प्रताप भानु मेहता के अनुसार, जेन ज़ी (Gen Z) का वर्तमान विरोध केवल सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक व्यवस्था और अपने माता-पिता की पीढ़ी के 'समझौतावादी रवैये' के खिलाफ एक मनोवैज्ञानिक विद्रोह है।

मुख्य बातें

  • जेन ज़ी का विरोध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक भी है।
  • यह पीढ़ी 'डर' को सामाजिक मानदंड मानने से इनकार कर रही है।
  • यह विद्रोह उस 'समझौतावादी राजनीति' के खिलाफ है जिसे पिछली पीढ़ियों ने अपनाया था।
  • छात्रों की मांगें बुनियादी हैं: निष्पक्षता, शिक्षा की गुणवत्ता और जवाबदेही।

प्रताप भानु मेहता के हालिया विश्लेषण के अनुसार, जेन ज़ी (Gen Z) का विरोध प्रदर्शन सरकार की अजेयता के भ्रम को तोड़ रहा है। झारखंड सहित विभिन्न हिस्सों में छात्रों का यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक सत्ता या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नहीं है। यह वास्तव में समाज की वर्तमान संरचना, संस्थाओं और उन सभी लोगों के खिलाफ एक विद्रोह है जो किसी न किसी रूप में इस व्यवस्था में शामिल रहे हैं।

यह कहना आश्चर्यजनक लग सकता है, क्योंकि छात्रों की मांगें क्रांतिकारी नहीं हैं। वे पूंजीवाद को उखाड़ फेंकने के लिए नहीं लड़ रहे हैं। उनकी मांगें बहुत ही साधारण और बुनियादी हैं: संस्थागत जवाबदेही, परीक्षाओं में निष्पक्षता, शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगार। छात्र संवैधानिक भाषा का उपयोग कर रहे हैं और वे संस्थानों में सुधार (जैसे UPSC में बेहतर नियुक्तियां) की मांग कर रहे हैं।

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन एक गहरे मनोवैज्ञानिक बदलाव का संकेत है। यह पीढ़ी 'डर' को एक सामाजिक नियम के रूप में स्वीकार करने से मना कर रही है। जहाँ एक ओर मोदी सरकार के बढ़ते सत्तावाद ने डर पैदा किया है, वहीं दूसरी ओर पिछली पीढ़ी ने 'जीवित रहने के लिए समझौते' (politics of accommodation) को एक जीवन शैली बना लिया था।

जेन ज़ी का विद्रोह इसलिए मौलिक है क्योंकि यह यह स्पष्ट कर रहा है कि समझौतावादी राजनीति अब कोई विकल्प नहीं बची है।

उदारीकरण के बाद की पीढ़ी ने राजनीति को निजी बना दिया था। उन्होंने माना कि सामूहिक आंदोलनों के बजाय व्यक्तिगत करियर पर ध्यान देना प्रगति का बेहतर तरीका है। लेकिन जेन ज़ी ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। जब करियर बनाने के लिए बुनियादी नियम (जैसे निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली) ही ध्वस्त हो रहे हों, तो केवल करियर पर ध्यान केंद्रित करना संभव नहीं है।क्या आप जानते हैं?: उदारीकरण के बाद भारत में राजनीतिक सक्रियता को अक्सर 'वामपंथी' कहकर खारिज कर दिया जाता था, जिससे सामाजिक आंदोलनों में कमी आई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. जेन ज़ी के विरोध का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण संस्थागत जवाबदेही की कमी, परीक्षाओं में धांधली और रोजगार की अनिश्चितता है।

2. यह विरोध पिछली पीढ़ियों से कैसे अलग है?
पिछली पीढ़ियों ने व्यवस्था के साथ समझौता करना सीखा था, जबकि जेन ज़ी उस समझौते को ही चुनौती दे रही है।