अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के सात साल बाद, जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग फिर से तेज हो गई है। जहाँ केंद्र सरकार विकास कार्यों का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे जनता के विश्वास के साथ समझौता बता रहा है।

मुख्य बातें

  • अनुच्छेद 370 के हटने के सात साल पूरे होने पर राजनीतिक बहस तेज।
  • विपक्ष ने जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की।
  • केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास कार्यों की सराहना की।

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के ऐतिहासिक निर्णय के सात साल पूरे होने के साथ ही, राज्य की राजनीतिक स्थिति को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। एक ओर जहाँ केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्र में हुए बदलावों और विकास की लहर का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नेताओं और विपक्षी दलों ने राज्य के पूर्ण दर्जा प्राप्त करने में हो रही देरी पर चिंता जताई है।

विपक्ष का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने में और अधिक देरी करना जनता के विश्वास का उल्लंघन होगा। पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर भावुक रुख अपनाते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के जख्म अभी भी भरे नहीं हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र की बहाली के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा अनिवार्य है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिरता सीधे तौर पर इसके संवैधानिक दर्जे से जुड़ी है। केंद्र शासित प्रदेश के रूप में शासन करने की वर्तमान व्यवस्था और पूर्ण राज्य की आकांक्षाओं के बीच का संघर्ष आने वाले चुनावों और क्षेत्रीय शांति को प्रभावित कर सकता है।

"जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिरता केवल विकास से नहीं, बल्कि जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं की पूर्ति से आएगी।"

ऐतिहासिक रूप से, 5 अगस्त 2019 का दिन जम्मू-कश्मीर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इस दिन अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया था।

क्या आप जानते हैं?: अनुच्छेद 370 के हटने के बाद, जम्मू-कश्मीर में केंद्र शासित प्रदेश के रूप में प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. अनुच्छेद 370 क्या था?
यह भारतीय संविधान का एक प्रावधान था जो जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता प्रदान करता था।

2. पूर्ण राज्य का दर्जा क्या है?
इसका अर्थ है कि राज्य के पास अपनी चुनी हुई सरकार और विधायी शक्तियां होंगी, न कि केवल केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल का शासन।