कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने की सहमति दी है, जिसमें उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।

मुख्य बातें

  • कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने यूपी में मतदाता सूची में धांधली का आरोप लगाया है।
  • आरोप है कि फॉर्म-7 का उपयोग अल्पसंख्यक और हाशिए के समुदायों के नाम हटाने के लिए किया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अगस्त के अंत में सुनवाई करने का संकेत दिया है।
  • याचिका में फर्जी हस्ताक्षर और गलत जानकारी के साथ बल्क डिलीशन का दावा किया गया है।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 के व्यापक दुरुपयोग और धोखाधड़ी से जुड़ी कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया की याचिका पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की है।

क्या है पूरा मामला?

फॉर्म-7 एक वैधानिक तंत्र है जिसका उपयोग मतदाता सूची में सुधार या किसी व्यक्ति का नाम हटाने (जैसे मृत्यु या स्थायी स्थानांतरण के आधार पर) के लिए किया जाता है। हालांकि, याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया का उपयोग लक्षित और धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से पात्र मतदाताओं, विशेष रूप से अल्पसंख्यक और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के नाम हटाने के लिए किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने तर्क दिया कि उनके पास ऐसे दस्तावेजी सबूत हैं जो दर्शाते हैं कि फॉर्म-7 का उपयोग बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने के लिए किया गया था।

बozokMedia विश्लेषण: लोकतंत्र के लिए खतरा

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह चुनावी प्रक्रिया की अखंडता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि कुछ मामलों में बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) को पहले से भरे हुए फॉर्म-7 प्राप्त हुए, जिनमें कई मतदाताओं के नाम हटाने का अनुरोध था।

"यह एक गंभीर संवैधानिक मुद्दा है, क्योंकि यह राजनीतिक भागीदारी के अधिकार और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की गारंटी पर प्रहार करता है।" - तनुज पुनिया (याचिका के अनुसार)

साक्ष्यों की भयावहता

याचिका में कुशीनगर जिले के हता विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया गया है, जहां एक ही व्यक्ति द्वारा 32 मतदाताओं के खिलाफ आपत्ति दर्ज की गई थी। इसके अलावा, संतकबीर नगर जिले में भी मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं को लक्षित करने के आरोप लगाए गए हैं।

कांग्रेस सांसद ने मांग की है कि फर्जी घोषणाएं करने और धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

क्या आप जानते हैं?: फॉर्म-7 का उपयोग केवल तभी किया जा सकता है जब कोई मतदाता वास्तव में स्थानांतरित हो गया हो या उसकी मृत्यु हो गई हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. फॉर्म-7 क्या है?
यह मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक कानूनी फॉर्म है।

2. इस मामले में मुख्य आरोप क्या है?
मुख्य आरोप यह है कि इस फॉर्म का उपयोग समुदायों को लक्षित करके फर्जी तरीके से नाम हटाने के लिए किया गया है।