तमिलनाडु के हालिया बजट में बाल संरक्षण तंत्र की अनदेखी को लेकर अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार बच्चों को केवल लाभार्थी मान रही है, न कि हितधारक।

मुख्य बातें

  • तमिलनाडु के संशोधित बजट 2026-27 में बाल संरक्षण योजनाओं का कोई उल्लेख नहीं है।
  • शिक्षा और पोषण पर ध्यान दिया गया है, लेकिन SCPCR और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को फंड नहीं मिला।
  • कार्यकर्ताओं ने 'ह्यूमन कैपिटल बजटिंग' से 'चाइल्ड राइट्स बजटिंग' की ओर बढ़ने की मांग की है।

तमिलनाडु के वित्त मंत्री N. मैरी विल्सन द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के संशोधित बजट अनुमानों ने राज्य के बाल अधिकार कार्यकर्ताओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस महत्वपूर्ण बजट में बाल संरक्षण क्षेत्र (Child Protection Sector) के लिए किसी भी प्रकार की घोषणा या विशेष प्रावधान नहीं किया गया है।

हालांकि बजट में शिक्षा और पोषण से संबंधित कई घोषणाएं की गई हैं—जैसे सुपर क्लीन कैंपस, एंटी-ड्रग क्लब, आधुनिक साइकिलें और बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों के लिए विशेष स्कूल—लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षात्मक ढांचे को पूरी तरह भुला दिया गया है। इसमें राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR), जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और जुवेनाइल होम के लिए कोई बजटीय सहायता शामिल नहीं है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केवल शिक्षा और पोषण पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं है। यदि बच्चों को सुरक्षित वातावरण नहीं मिलता, तो शिक्षा और पोषण का दीर्घकालिक प्रभाव सीमित हो सकता है। तमिलनाडु में बढ़ते बाल यौन शोषण और बाल विवाह के मामलों को देखते हुए, सुरक्षा तंत्र का मजबूत होना अनिवार्य है।

"सरकार बच्चों को केवल लाभार्थी के रूप में देख रही है, जबकि उन्हें नीति निर्माण में एक महत्वपूर्ण हितधारक माना जाना चाहिए।" — बाल अधिकार कार्यकर्ता

विकास सलाहकार कल्पना सतीश ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में बच्चों के कल्याण के लिए आवंटित धन का 53% शिक्षा और 23% पोषण पर खर्च किया गया है, लेकिन बाल संरक्षण के लिए खर्च का ढांचा बेहद असंतुलित है। उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ते बाल शोषण और पलायन जैसे मुद्दों से निपटने के लिए राज्य को केवल केंद्रीकृत फंड पर निर्भर रहने के बजाय निवेश में क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में बाल अधिकार संरक्षण के लिए कानून और संस्थागत ढांचे (जैसे JJ Act) मौजूद हैं, लेकिन राज्य स्तर पर इन संस्थाओं के कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय स्वायत्तता का अभाव अक्सर एक बड़ी चुनौती बना रहता है।

क्या आप जानते हैं?: बाल अधिकारों के पूर्ण विकास के लिए 'चाइल्ड राइट्स बजटिंग' एक वैश्विक मानक है, जहाँ हर निवेश का मूल्यांकन बच्चे की सुरक्षा और भागीदारी के आधार पर किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बजट में किन क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है?
बजट में मुख्य रूप से शिक्षा, पोषण, एंटी-ड्रग क्लब और विशेष स्कूलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

2. कार्यकर्ताओं की मुख्य चिंता क्या है?
मुख्य चिंता यह है कि SCPCR और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड जैसे सुरक्षात्मक संस्थानों के लिए कोई विशेष फंड आवंटित नहीं किया गया है।