दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन CAG की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें AAP सरकार के कार्यकाल के दौरान बिजली सब्सिडी में ₹42 करोड़ के वित्तीय अंतर और टैक्स में ₹220 करोड़ की विसंगतियों का दावा किया गया है।

मुख्य बातें

  • CAG रिपोर्ट ने 2019-20 से 2022-23 के बीच बिजली सब्सिडी में ₹42.26 करोड़ की खामियों को उजागर किया है।
  • टैक्स और शुल्क में ₹220.59 करोड़ की विसंगतियां पाई गईं।
  • विपक्ष ने सत्र में 'प्रश्न काल' न होने पर भाजपा सरकार की आलोचना की।
  • दिल्ली सरकार निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए नए विधेयक लाने की तैयारी में है।

दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन भारी हंगामे के बीच, भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक महत्वपूर्ण ऑडिट रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गई। इस रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी (AAP) के शासनकाल के दौरान बिजली सब्सिडी योजना में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया गया है।

सब्सिडी और वित्तीय अनियमितताएं

CAG के ऑडिट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों (2019-20 से 2022-23) के दौरान ₹42.26 करोड़ की ऐसी सब्सिडी दी गई, जो उन घरेलू उपभोक्ताओं को मिली जिनका लगातार कई बिलिंग चक्रों तक कोई बिजली उपभोग दर्ज नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में 145 अलग-अलग मामलों में टैक्स और शुल्क संबंधी ₹220.59 करोड़ की विसंगतियों की भी पहचान की गई है।

सब्सिडी का वितरण और असमानता

रिपोर्ट ने सब्सिडी वितरण के ढांचे पर भी सवाल उठाए हैं। आंकड़ों के अनुसार, जो उपभोक्ता 200 यूनिट तक बिजली का उपयोग करते हैं, उन्हें औसतन ₹6,000 की वार्षिक सब्सिडी मिली, जबकि 200 यूनिट से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को ₹10,000 से अधिक की सब्सिडी मिली—जो कि लगभग 70% अधिक है।

CAG की यह रिपोर्ट सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी और वित्तीय प्रबंधन में बड़ी चूक की ओर इशारा करती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला न केवल वित्तीय जवाबदेही से जुड़ा है, बल्कि यह दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है। बिजली सब्सिडी दिल्ली की कुल सब्सिडी का लगभग 70% हिस्सा है, और इसमें हुई किसी भी गड़बड़ी का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ता है।

विवरणराशि (करोड़ में)
सब्सिडी में खामियां₹42.26 करोड़
टैक्स और शुल्क विसंगतियां₹220.59 करोड़
बपरोला भूमि व्यय (अनुत्पादक)₹29.45 करोड़

इसके अलावा, सदन में 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' के लिए धन्यवाद प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसके तहत महिलाओं को ₹2,500 की वित्तीय सहायता दी जाएगी। साथ ही, मुख्यमंत्री कार्यालय ने घोषणा की कि दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए एक नया कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: दिल्ली की कुल सब्सिडी राशि 2019-20 में ₹2,405 करोड़ थी, जो 2022-23 तक बढ़कर ₹3,161 करोड़ हो गई।

Frequently Asked Questions

1. CAG रिपोर्ट में मुख्य आरोप क्या हैं?
मुख्य आरोप बिजली सब्सिडी के गलत वितरण और टैक्स गणना में भारी विसंगतियों से संबंधित हैं।

2. विपक्ष ने क्या आपत्ति जताई?
विपक्ष ने सत्र में 'प्रश्न काल' (Question Hour) को शामिल न किए जाने पर सरकार की कड़ी आलोचना की है।