केन-बेतवा लिंक परियोजना से उत्पन्न विस्थापन और वन अधिकार संबंधी शिकायतें केंद्र ने राज्य सरकार को सौंप दी हैं। यह कदम केंद्र और राज्य के बीच जिम्मेदारी विभाजन को उजागर करता है, जबकि स्थानीय लोगों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला।

मुख्य बिंदु

  • केंद्र ने सभी शिकायतें राज्य सरकार को भेज दीं।
  • वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी राज्य की है।li>
  • स्थानीय लोगों को पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला।

परिचय

विरोधी दलों ने केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के कारण विस्थापन और वन अधिकार उल्लंघन की शिकायतें उठाई। संसद में विपक्षी सांसदों के प्रश्नों पर, केंद्र के जनजातीय मामलों मंत्रालय ने बताया कि ये सभी मुद्दे राज्य सरकार को भेजे जा रहे हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

केन-बेतवा लिंक परियोजना 1980 में राष्ट्रीय दृष्टिकोण योजना (NPP) के तहत शुरू हुई, जिसका उद्देश्य अधिक जल वाले क्षेत्रों से जल की कमी वाले क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना है। इस योजना में 221 किमी लंबी नहर और 2 किमी टनल का निर्माण शामिल है, जिससे 7,000 से अधिक परिवारों का विस्थापन हुआ।

केंद्रीय और राज्य की भूमिकाएँ

केंद्र ने बताया कि 2013 के भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास अधिनियम के तहत सभी कार्य राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। इसी तरह, 2006 के वन अधिकार अधिनियम के तहत भी राज्य को कार्यान्वयन एजेंसी माना गया है। हालांकि, जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में परियोजना आगे बढ़ रही है, जबकि जनजातीय मामलों मंत्रालय को नोडल एजेंसी के रूप में मान्यता दी गई है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the shifting of responsibility may dilute accountability, leaving affected communities without timely redressal and exposing gaps in inter‑governmental coordination.

"यहाँ तक कि केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय की भी भूमिका सीमित है," Dr. Rajesh Kumar, नीति विशेषज्ञ ने कहा।
क्या आप जानते हैं?: केन-बेतवा परियोजना में 221 किमी नहर और 2 किमी टनल शामिल है, जिससे 103 MW जलविद्युत और 27 MW सौर ऊर्जा उत्पन्न होगी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या राज्य सरकार ने सभी विस्थापित परिवारों को पूर्ण मुआवजा दिया है?

उत्तर: अभी तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन कई परिवारों ने आंशिक या बिना मुआवजे के विस्थापन की शिकायत की है।

प्रश्न 2: ग्राम सभा के सहमति प्रक्रिया में क्या irregularities पाई गई हैं?

उत्तर: विरोधियों का दावा है कि कई ग्राम सभाओं में उचित सूचना और भागीदारी नहीं हुई, जिससे प्रक्रिया को प्रश्नांकित किया गया है।