थेनी जिले के मेगामालाई क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने बेदखली के नोटिस के खिलाफ थेनी कलेक्टरेट के बाहर विशाल विरोध प्रदर्शन किया। सीपीआई(एम) के नेतृत्व में ग्रामीणों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत अपने अधिकारों की मांग की है।

मुख्य बिंदु

  • मेगामालाई के हजारों निवासियों ने बेदखली के नोटिस के खिलाफ थेनी कलेक्टरेट पर प्रदर्शन किया।
  • सीपीआई(एम) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
  • ग्रामीणों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि स्वामित्व की मांग की है।
  • क्षेत्र को श्रीविल्लीपुथुर-मेगामालाई टाइगर रिजर्व का हिस्सा घोषित किया गया है।

तमिलनाडु के थेनी जिले के मेगामालाई क्षेत्र में तनाव का माहौल है। शुक्रवार को हजारों की संख्या में पहाड़ी गांवों के निवासियों ने थेनी कलेक्टरेट के सामने एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन वन विभाग द्वारा जारी किए गए बेदखली के नोटिसों के जवाब में किया गया, जिससे स्थानीय समुदाय में भारी रोष है।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व सीपीआई(एम) (CPI-M) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दायर करे ताकि मेगामालाई क्षेत्र के लोगों को उनके अधिकारों और भूमि तक पहुंच वापस मिल सके। ग्रामीणों का तर्क है कि वे पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से इन क्षेत्रों में रह रहे हैं और कृषि उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद संरक्षण बनाम आजीविका के बीच के पुराने संघर्ष को दर्शाता है। जब किसी क्षेत्र को श्रीविल्लीपुथुर-मेगामालाई टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित किया जाता है, तो वन्यजीव संरक्षण के नियम अक्सर वहां दशकों से रह रहे समुदायों के अधिकारों से टकराते हैं।

वन अधिकार अधिनियम के तहत, वन में रहने वाले समुदायों को भूमि का अधिकार मिलना चाहिए, न कि उन्हें बेदखल किया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान, पी. शनमुगम ने जोर देकर कहा कि वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के तहत, वन निवासी समुदायों को भूमि के पट्टे दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को उन्हें उनकी पैतृक भूमि से बेदखल करने के बजाय उनके अधिकारों को कानूनी रूप से सुरक्षित करना चाहिए। कलेक्टरेट में भारी भीड़ के कारण यातायात को भी डायवर्ट करना पड़ा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मेगामालाई क्षेत्र के निवासी पीढ़ियों से इन पहाड़ियों पर कृषि और अन्य गतिविधियों के माध्यम से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने के बाद से, वन विभाग ने प्रतिबंधों को कड़ा कर दिया है और निवासियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना पर संकट मंडरा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: मेगामालाई क्षेत्र अपनी जैव विविधता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, जो इसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: ग्रामीण किस कानून का हवाला दे रहे हैं?
उत्तर: ग्रामीण 'वन अधिकार अधिनियम' का हवाला दे रहे हैं, जो वन समुदायों को भूमि अधिकार प्रदान करता है।

प्रश्न 2: विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य कारण वन विभाग द्वारा जारी किए गए बेदखली के नोटिस हैं, जो क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने के बाद जारी किए गए हैं।