प्रयागराज में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सोशल मीडिया रील्स एक नया नशा बन चुका है और युवाओं को बेरोजगारी के चक्रव्यूह में फंसाया जा रहा है।
मुख्य बातें
- राहुल गांधी ने सोशल मीडिया रील्स को '21वीं सदी का नशा' करार दिया।
- उन्होंने कहा कि शिक्षा के बावजूद युवाओं को दिहाड़ी मजदूर बनने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
- डेटा को भारत की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए राहुल ने इसके दुरुपयोग पर चिंता जताई।
- प्राइवेट नौकरी के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए बेरोजगारी के संकट को उजागर किया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और डिजिटल युग के खतरों पर विस्तार से चर्चा की।
डिजिटल युग का नया संकट: रील्स का नशा
राहुल गांधी ने एक अत्यंत गंभीर विषय उठाते हुए कहा कि आज इंस्टाग्राम और फेसबुक रील्स देखना युवाओं के लिए '21वीं सदी का नशा' बन गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस डिजिटल भटकाव के बीच युवाओं का ध्यान और ऊर्जा दोनों नष्ट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा और लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी रोजगार नहीं मिलता, तो युवा मजबूरी में ब्लिंकिट और उबर जैसी कंपनियों में 10-10 घंटे दिहाड़ी मजदूर की तरह काम करने को मजबूर हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, राहुल गांधी का यह बयान सीधे तौर पर भारत की 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (जनसांख्यिकीय लाभांश) के भविष्य से जुड़ा है। यदि देश की विशाल युवा शक्ति केवल डिजिटल मनोरंजन में उलझी रही या उन्हें उचित कौशल और रोजगार नहीं मिला, तो यह आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
"आज का युवा एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसा है जहाँ एक तरफ डिजिटल भटकाव है और दूसरी तरफ रोजगार का अभाव।"
राहुल गांधी ने डेटा की ताकत पर जोर देते हुए कहा कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा डेटा भंडार है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस तरह पेट्रोल के बिना इंजन नहीं चल सकता, उसी तरह डेटा के बिना AI का कोई अस्तित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि यह डेटा भारत की असली पूंजी है, जिसे सही दिशा में उपयोग किया जाना चाहिए।
शिक्षा और बेरोजगारी का कड़वा सच
कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि कैसे पेपर लीक और आर्थिक तंगी ने उसका भविष्य अंधकार में डाल दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज डिग्री का कोई मूल्य नहीं रह गया है क्योंकि वह रोजगार की गारंटी नहीं देती। उन्होंने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया कि वर्तमान स्थिति में 1000 युवाओं में से केवल 12 को ही प्राइवेट नौकरी मिल पाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. राहुल गांधी ने 'रील्स' को क्या कहा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया रील्स को '21वीं सदी का नशा' कहा है जो युवाओं को भटका रहा है।
2. राहुल गांधी ने डेटा के बारे में क्या तर्क दिया?
उन्होंने कहा कि डेटा भारत की सबसे बड़ी संपत्ति (Asset) है और AI के विकास के लिए यह पेट्रोल की तरह अनिवार्य है।