वायनाड के सुल्तान बथेरी में आयोजित एक महत्वपूर्ण आदिवासी-दलित सम्मेलन में मुथंगा संघर्ष के पीड़ितों और योगी की मौत की गहन जांच की मांग की गई। इस सभा का उद्घाटन मुथंगा संघर्ष की जीवित साक्षी बोम्मी अम्मा ने किया।
मुख्य बातें
- मुथंगा संघर्ष के पीड़ितों और योगी की मृत्यु की जांच की मांग।
- बोम्मी अम्मा द्वारा सम्मेलन का उद्घाटन।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के कार्यान्वयन पर जोर।
- अम्बेडकरवादी डेमोक्रेटिक फ्रंट और आदिवासी गोत्र महासभा द्वारा आयोजन।
वायनाड के सुल्तान बथेरी में रविवार को 'अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस' के अवसर पर एक विशाल आदिवासी-दलित सम्मेलन और 'अधिकारों की घोषणा' का आयोजन किया गया। इस सभा का मुख्य उद्देश्य 2003 के मुथंगा भूमि आंदोलन के दौरान हुई पुलिस फायरिंग में मारे गए योगी (जोगी) की मृत्यु और मानवाधिकारों के उल्लंघन की व्यापक जांच की मांग को तेज करना है।
इस ऐतिहासिक सभा का उद्घाटन चेरल की बोम्मी अम्मा द्वारा किया गया, जो मुथंगा संघर्ष में शामिल होने वाली सबसे बुजुर्ग जीवित प्रतिभागी हैं। सम्मेलन में भूमि आंदोलन से जुड़े कई पूर्व कार्यकर्ताओं ने अपने संघर्ष और अनुभवों को साझा किया। यह आयोजन आदिवासी गोत्र महासभा (AGMS) और अम्बेडकरवादी डेमोक्रेटिक फ्रंट (ADF) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मुथंगा मामला केवल एक स्थानीय संघर्ष नहीं है, बल्कि यह भारत में आदिवासी भूमि अधिकारों और राज्य की पुलिस कार्रवाई के बीच के जटिल संबंधों का प्रतीक है। हाल ही में कलपेट्टा प्रधान सत्र न्यायालय द्वारा दिए गए फैसलों ने इस मुद्दे को फिर से राजनीतिक और सामाजिक रूप से गरमा दिया है।
न्याय में देरी, न्याय से वंचित रखने के समान है, विशेषकर उन समुदायों के लिए जिन्होंने दशकों से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है।
AGMS के महासचिव पी.जी. जनार्दनन ने 'अधिकारों की घोषणा' प्रस्तुत की। इस प्रस्ताव में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा मुथंगा हिंसा के दौरान हुए मानवाधिकारों के उल्लंघन की व्यापक जांच के निर्देश को लागू करने और हिंसा से प्रभावित सभी लोगों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई। सभा में मृतक योगी के पुत्र सिवन योगी भी उपस्थित थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मुथंगा भूमि आंदोलन 2003 में केरल के वायनाड में आदिवासियों द्वारा अपनी पारंपरिक भूमि पर अधिकार वापस पाने के लिए किया गया एक बड़ा संघर्ष था। इस आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में कई लोगों की जान गई थी, जिससे यह मुद्दा आज भी न्याय की प्रतीक्षा में बना हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. मुथंगा संघर्ष क्या था?
यह 2003 में वायनाड के आदिवासियों द्वारा भूमि अधिकारों की मांग को लेकर किया गया एक आंदोलन था।
2. सम्मेलन में मुख्य मांग क्या थी?
मुख्य मांग योगी की मृत्यु की निष्पक्ष जांच और मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को मुआवजा देना है।