इंडियन सोलर एसोसिएशन के अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि पिछले पांच वर्षों में डीएमके सरकार के दौरान लगभग 4,000 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं। विरूधुनगर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं।

मुख्य बातें

  • डीएमके शासन के दौरान लगभग 4,000 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं भ्रष्टाचार से प्रभावित हुईं।
  • विरुधुनगर में 1,750 मेगावाट के सब-स्टेशन को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
  • वर्तमान टीवीके सरकार ने इन परियोजनाओं को निलंबित कर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
  • रूटटॉप सोलर योजना के तहत तमिलनाडु में केंद्र की तुलना में बहुत कम लाभार्थी हैं।

तमिलनाडु में सौर ऊर्जा क्षेत्र एक बड़े संकट से गुजर रहा है। इंडियन सोलर एसोसिएशन (ISA) के अध्यक्ष सी. नरसिम्हन ने खुलासा किया है कि पिछले पांच वर्षों में डीएमके (DMK) सरकार के दौरान व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण लगभग 4,000 मेगावाट (MW) की सौर ऊर्जा परियोजनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।

भ्रष्टाचार के मामले केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं। नरसिम्हन के अनुसार, विरुधुनगर में 1,750 मेगावाट की सौर ऊर्जा के लिए बनाया जा रहा एक सब-स्टेशन कथित तौर पर कुछ मंत्रियों द्वारा 'बेचा' गया था। राज्य के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। राहत की बात यह है कि नई टीवीके (TVK) सरकार ने इन सभी संदिग्ध परियोजनाओं को निलंबित कर दिया है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ऊर्जा क्षेत्र में भ्रष्टाचार न केवल निवेश को रोकता है, बल्कि देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को भी पीछे धकेलता है। यदि बड़े पैमाने पर सौर परियोजनाओं में पारदर्शिता नहीं होगी, तो तमिलनाडु अपने हरित ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहेगा।

भ्रष्टाचार ने न केवल निवेशकों का भरोसा तोड़ा है, बल्कि तमिलनाडु के सौर ऊर्जा भविष्य को भी खतरे में डाल दिया है।

रूटटॉप सोलर के मामले में, तमिलनाडु का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है। जहां देश भर में 60 लाख घर पीएम रूफटॉप सोलर योजना से लाभान्वित हुए हैं, वहीं तमिलनाडु में यह संख्या 50,000 से भी कम है। हालांकि, राज्य सरकार ने बजट में सब्सिडी बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तमिलनाडु ऐतिहासिक रूप से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा हब में से एक रहा है। पिछले दशक में, राज्य ने पवन और सौर ऊर्जा में भारी निवेश आकर्षित किया है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक भ्रष्टाचार अक्सर इन विकासों में बाधा बनते रहे हैं।

क्या आप जानते हैं?: भारत में सौर सेल उत्पादन की क्षमता 65 GW है, लेकिन मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 161 GW तक पहुंच चुकी है, जिससे सेल आयात की मांग बढ़ी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: टीवीके सरकार ने संदिग्ध सौर परियोजनाओं को निलंबित कर दिया है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

प्रश्न 2: क्या नए निवेशक अभी भी सौर परियोजनाओं में निवेश कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, निवेशकों को अब ऑनलाइन आवेदन करना होगा और सरकार से आधिकारिक मंजूरी प्राप्त करनी होगी।