केरल की यूडीएफ सरकार ने पेंशन वितरण के लिए डोरस्टेप डिलीवरी को खत्म कर पूरी तरह से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) अपनाने का निर्णय लिया है, जिससे राज्य में राजनीतिक घमासान मच गया है।

मुख्य बिंदु

  • यूडीएफ सरकार ने पेंशन के लिए डोरस्टेप डिलीवरी बंद कर पूरी तरह DBT मोड अपनाने का फैसला किया है।
  • लगभग 23 लाख पेंशनभोगी वर्तमान में घर पर पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
  • एलडीएफ ने इस निर्णय का विरोध करते हुए इसे बुजुर्गों के लिए कष्टदायक बताया है।
  • सीएजी (CAG) ने पहले ही डोरस्टेप डिलीवरी में धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं की चेतावनी दी थी।

केरल की राजनीति में पेंशन वितरण एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। वर्तमान कांग्रेस-led यूडीएफ (UDF) सरकार ने राज्य वित्त विभाग के एक आदेश के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन की डोरस्टेप डिलीवरी को समाप्त करने और इसे पूरी तरह से आधार-लिंक्ड बैंक ट्रांसफर (DBT) में बदलने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना और बिचौलियों को खत्म करना है।

विपक्ष, विशेष रूप से एलडीएफ (LDF), ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन का तर्क है कि यह निर्णय उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी कठिनाई पैदा करेगा जिनकी बैंकों तक पहुंच सीमित है। एलडीएफ का आरोप है कि यह सरकार पेंशन योजनाओं को धीरे-धीरे कमजोर करने की साजिश रच रही है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है (BozokMedia विश्लेषण)

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल प्रशासनिक बदलाव का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का है। केरल में लगभग 60 लाख लोग पेंशन के लाभार्थी हैं, जो किसी भी चुनाव में निर्णायक वोट बैंक साबित होते हैं। सरकार एक तरफ 'सिल्वर इकोनॉमी' विकसित करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) के कारण ग्रामीण बुजुर्गों के बीच असंतोष बढ़ने का खतरा है।

"डिजिटलीकरण पारदर्शिता लाता है, लेकिन कल्याणकारी योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचे।"

ऐतिहासिक रूप से, 2016 में एलडीएफ सरकार ने सहकारी समितियों के माध्यम से डोरस्टेप डिलीवरी शुरू की थी। हालांकि, 2023 में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने इस प्रणाली में गंभीर खामियां पाई थीं। आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने 2016-17 से आठ वित्तीय वर्षों में डिलीवरी प्रोत्साहन के रूप में ₹434.89 करोड़ खर्च किए, जबकि कई मामलों में अपात्र लोगों को भुगतान किया गया।

विशेषता डोरस्टेप डिलीवरी (DTH) डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)
पहुंच घर पर भुगतान (आसान) बैंक खाते में (बैंक जाना पड़ता है)
पारदर्शिता कम (धोखाधड़ी की संभावना) उच्च (सीधा ट्रांसफर)
लागत उच्च (डिलीवरी इंसेंटिव) न्यूनतम (डिजिटल)
क्या आप जानते हैं? केरल की सहकारी संस्थाएं देश की सबसे मजबूत जमीनी प्रणालियों में से एक मानी जाती हैं, जो सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: DBT मोड से पेंशनभोगी को क्या लाभ होगा?
उत्तर: इससे भुगतान में देरी नहीं होगी, बिचौलियों का हस्तक्षेप खत्म होगा और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाएगी।

प्रश्न 2: विपक्ष इस फैसले का विरोध क्यों कर रहा है?
उत्तर: विपक्ष का मानना है कि डिजिटल साक्षरता की कमी और बैंकों की दूरी के कारण बुजुर्गों को अपनी पेंशन निकालने में भारी परेशानी होगी।