दुनिया के सबसे प्रगतिशील विकलांगता सहायता कार्यक्रमों में से एक, NDIS, बढ़ते खर्चों के कारण अब बड़े पुनर्गठन और कड़े नियंत्रणों का सामना कर रहा है।

मुख्य बातें

  • NDIS का बजट $22 बिलियन से बढ़कर $54 बिलियन हो गया है।
  • सरकार अब खर्चों को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियमों का प्रस्ताव कर रही है।
  • 700,000 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई इस योजना पर निर्भर हैं।
  • बढ़ते खर्च और धोखाधड़ी के आरोपों ने सुधारों को अनिवार्य बना दिया है।

ऑस्ट्रेलिया का नेशनल डिसेबिलिटी इंश्योरेंस स्कीम (NDIS), जो कभी विकलांग व्यक्तियों के लिए स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता सुधारने का एक क्रांतिकारी कदम था, अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। योजना की सफलता ही इसकी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि इसके खर्चों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

एनाबेल शॉ जैसे हजारों बच्चों के लिए, NDIS केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि उनके जीवन का आधार है। डाउन सिंड्रोम से जूझ रही एनाबेल को हॉकी खेलने और जिम जाने के लिए आवश्यक सहायता राशि इसी फंड से मिलती है। लेकिन अब, संघीय सरकार द्वारा प्रस्तावित नए संशोधन इस सहायता को सीमित कर सकते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि NDIS का बजट शुरुआती अनुमानित $22 बिलियन से बढ़कर अब $54 बिलियन तक पहुंच गया है। यह तीव्र वृद्धि सरकार के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गई है। यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो यह योजना भविष्य की पीढ़ियों के लिए अस्थिर हो सकती है।

विकलांगता को कठिन बनाने वाली असली चीज़ पैसे और शक्ति की कमी है।

ग्रैटन इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ सहयोगी हन्ना ऑर्बन का कहना है कि योजना को टिकाऊ बनाने के लिए सुधार आवश्यक हैं। जहाँ एक ओर विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य सरकारी सेवाओं (जैसे स्कूल और अस्पताल) के पीछे हटने से सारा बोझ NDIS पर आ गया है, वहीं दूसरी ओर धोखाधड़ी और अनावश्यक सेवाओं के लिए फंड के दुरुपयोग के आरोप भी लग रहे हैं।

NDIS का विकास: एक तुलना

विशेषताप्रारंभिक अनुमानवर्तमान स्थिति
वार्षिक लागत$22 बिलियन$54 बिलियन
प्रतिभागी संख्या~475,000700,000+
क्या आप जानते हैं?: NDIS को 2012 में पूर्व प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड के कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था, लेकिन इसे पूर्ण रूप से लागू होने में आठ साल लगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. NDIS में बदलाव क्यों किए जा रहे हैं?
बढ़ते बजट और खर्चों को नियंत्रित करने के लिए सरकार कड़े नियम लागू कर रही है।

2. क्या इससे लाभार्थियों को नुकसान होगा?
नए संशोधन सहायता राशि और पात्रता के नियमों को सख्त बना सकते हैं, जिससे कुछ परिवारों पर असर पड़ सकता है।