NEET परीक्षा संकट से उपजे जंतर मंतर के विरोध प्रदर्शनों ने भारत के इंटरनेट गवर्नेंस और डिजिटल निगरानी के तरीकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लेख में बताया गया है कि कैसे सरकार ऐप्स पर प्रतिबंध और AI निगरानी का उपयोग कर रही है।

मुख्य बातें

  • NEET परीक्षा विवाद के दौरान डिजिटल नियंत्रण के बढ़ते उपयोग पर चिंता।
  • टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध और डेटा सुरक्षा के अभाव का मुद्दा।
  • AI-आधारित चेहरे की पहचान (FRT) तकनीक का बिना किसी स्पष्ट नियम के उपयोग।
  • डिजिटल अधिकारों और गोपनीयता के बीच बढ़ता टकराव।

हाल ही में NEET परीक्षा संकट के कारण जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों ने भारत के डिजिटल गवर्नेंस ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। जो शुरुआत परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ आक्रोश से हुई थी, वह अब इस बात का उदाहरण बन गई है कि जब भी ऑफलाइन शासन को चुनौती दी जाती है, तो डिजिटल नियंत्रण सरकार का पहला हथियार बन जाता है।

सरकार ने इंटरनेट और मैसेजिंग ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने, निगरानी बढ़ाने और बिग टेक कंपनियों को डराने जैसे उपकरणों का उपयोग किया है। टेलीग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगाना एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। न्यायालय ने इसे 'न्यूनतम प्रतिबंधात्मक' उपाय माना, लेकिन इससे लाखों उपयोगकर्ताओं पर पड़ने वाले असमान प्रभाव की अनदेखी की गई है।

Why This Matters (यह क्यों महत्वपूर्ण है)

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के कदम भारत की वैश्विक छवि को एक 'अनिश्चित लोकतंत्र' के रूप में पेश कर सकते हैं। जब सरकार किसी प्लेटफॉर्म को उसके कुछ उपयोगकर्ताओं के दुरुपयोग के आधार पर पूरी तरह से ब्लॉक कर देती है, तो यह नवाचार (innovation) और व्यापार सुगमता (ease of doing business) को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

डिजिटल नियंत्रण के नाम पर मौलिक अधिकारों का हनन लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

इसके अलावा, विरोध प्रदर्शनों के दौरान AI-आधारित फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) और 'इक्षणा' जैसे निगरानी वाहनों का उपयोग किया गया। पुलिस के अनुसार, FRT के उपयोग के लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं और न ही कोई गोपनीयता प्रभाव मूल्यांकन (privacy impact assessment) किया जाता है। यह स्थिति भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम की सीमाओं को भी दर्शाती है।

क्या आप जानते हैं?: यूरोपीय संघ का AI एक्ट सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस द्वारा लाइव फेशियल रिकग्निशन तकनीक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है।

Frequently Asked Questions

1. सरकार टेलीग्राम जैसे ऐप्स को क्यों प्रतिबंधित कर सकती है?
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार कुछ सूचनाओं या प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच को ब्लॉक कर सकती है।

2. फेशियल रिकग्निशन तकनीक (FRT) के क्या जोखिम हैं?
FRT में गलत पहचान की उच्च संभावना होती है और यदि इसके लिए कोई सख्त नियम न हों, तो यह निजता के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।