गडग जिले के चार बार के कांग्रेस विधायक जी.एस. पाटिल को सर्वसम्मति से कर्नाटक विधानसभा का नया अध्यक्ष चुना गया है। वह एक राजनेता होने के साथ-साथ किसान, शिक्षाविद् और पूर्व खिलाड़ी भी हैं।
मुख्य बातें
- जी.एस. पाटिल कर्नाटक विधानसभा के 18वें अध्यक्ष चुने गए हैं।
- उनका नाम मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
- बीजेपी ने एआईसीसी लेटरहेड के इस्तेमाल का विरोध करते हुए चुनाव का बहिष्कार किया।
- पाटिल उत्तर कर्नाटक से आने वाले पहले अध्यक्षों में से एक हैं।
कर्नाटक विधानसभा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के दौरान, गडग जिले के रोन से चार बार के कांग्रेस विधायक गुरुपदगौडा संगनगौडा पाटिल (जी.एस. पाटिल) को सर्वसम्मति से नया विधानसभा अध्यक्ष चुना गया। 1972 के बाद वे विधानसभा के 18वें अध्यक्ष बने हैं।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उनका नाम प्रस्तावित किया, जबकि उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने उनका समर्थन किया। विधानसभा में सदस्यों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। हालांकि, इस चुनाव के दौरान राजनीतिक गहमागहमी भी देखने को मिली जब बीजेपी ने कांग्रेस उच्च कमान द्वारा एआईसीसी लेटरहेड पर नाम भेजने के फैसले के विरोध में चुनाव का बहिष्कार किया।
बहुआयामी व्यक्तित्व
78 वर्षीय श्री पाटिल केवल एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि उनका व्यक्तित्व अत्यंत विविध है। उन्हें 'रोन गौड़ु' परिवार के रूप में जाना जाता है और वे एक कुशल किसान, शिक्षाविद् और सहकारी नेता भी हैं। खेल के क्षेत्र में, वे मैसूर राज्य टीम के लिए एक विकेटकीपर-बल्लेबाज रह चुके हैं।
जी.एस. पाटिल का चुनाव उत्तर कर्नाटक के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, पाटिल का अध्यक्ष बनना राज्य की राजनीति में उत्तर कर्नाटक की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। यू.टी. खादर के इस्तीफे के बाद यह पद खाली हुआ था। पाटिल का अनुभव विधायी कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कर्नाटक विधानसभा में अध्यक्ष का पद अत्यंत गरिमामय होता है। पाटिल का परिवार राजनीति में गहरा प्रभाव रखता है; उनके भाई आर.एस. पाटिल पूर्व सांसद रहे हैं और उनके एक अन्य भाई बी.एस. पाटिल कर्नाटक के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: जी.एस. पाटिल किस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं?
उत्तर: वे गडग जिले के रोन निर्वाचन क्षेत्र से चार बार के विधायक रहे हैं।
प्रश्न 2: बीजेपी ने चुनाव का बहिष्कार क्यों किया?
उत्तर: बीजेपी ने विरोध जताया कि अध्यक्ष का नाम विधानसभा के बजाय एआईसीसी लेटरहेड के माध्यम से सूचित किया गया।