कर्नाटक कैबिनेट ने सार्वजनिक संपत्तियों और सरकारी परिसरों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए 'कर्नाटक विनियमन विधेयक 2026' को मंजूरी दी है। यह कदम हाल ही में आरएसएस मार्च को लेकर उपजे विवाद के बाद उठाया गया है।

मुख्य बातें

  • कर्नाटक सरकार ने सार्वजनिक स्थानों के उपयोग के लिए नया विधेयक 2026 पारित किया।
  • यह नया कानून 2025 के पुराने सरकारी आदेश का स्थान लेगा।
  • किसी भी आयोजन के लिए पुलिस और राजस्व अधिकारियों से कम से कम तीन दिन पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

बेंगलुरु: कर्नाटक कैबिनेट ने गुरुवार को निजी कार्यक्रमों के लिए सार्वजनिक परिसरों के उपयोग को विनियमित करने हेतु एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी है। 'कर्नाटक विनियमन उपयोग सरकारी परिसर और सार्वजनिक संपत्ति विधेयक, 2026' अब उस पुराने सरकारी आदेश की जगह लेगा, जिसने हाल ही में राजनीतिक विवादों को जन्म दिया था।

यह कानूनी बदलाव विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब अक्टूबर 2025 में चित्तूर निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक रूट मार्च की अनुमति न मिलने पर भारी विवाद हुआ था। तत्कालीन गृह मंत्री प्रियांका खड़गे द्वारा आरएसएस की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की मांग के बाद यह विधेयक प्रस्तावित किया गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विधेयक केवल प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि राज्य में राजनीतिक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। नए नियमों के तहत, किसी भी संगठन को सार्वजनिक स्थानों (जैसे पार्क, सड़क, खेल के मैदान या जलाशय) का उपयोग करने के लिए पुलिस और राजस्व अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

यह कानून सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर राजनीतिक संगठनों की गतिविधियों को नियंत्रित करने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।

विवाद की जड़ में चित्तूर तहसीलदार का वह निर्णय था, जिसमें उन्होंने आरएसएस की अनुमति इस आधार पर खारिज कर दी थी कि संगठन ने प्रतिभागियों की संख्या और सुरक्षा उपकरणों (जैसे लाठी) का विवरण नहीं दिया था। नए विधेयक में भी इसी तरह के कड़े प्रावधान होने की संभावना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक में सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर विवाद पुराना है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सार्वजनिक स्थलों पर रैलियों और मार्चों के लिए सरकार के नियंत्रण को चुनौती दी है। यह नया विधेयक इसी संघर्ष को कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

क्या आप जानते हैं?: नए नियमों के तहत, यदि कोई आयोजन बिना अनुमति के किया जाता है, तो पुलिस स्वतः संज्ञान (suo motu) लेकर मामला दर्ज कर सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. नए विधेयक के तहत अनुमति कब लेनी होगी?
किसी भी कार्यक्रम के लिए कम से कम तीन दिन पहले पुलिस और राजस्व अधिकारियों से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है।

2. 'सरकारी संपत्ति' में क्या-क्या शामिल है?
इसमें कोई भी भूमि, भवन, सड़क, पार्क, खेल का मैदान या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा प्रबंधित जलाशय शामिल हैं।