तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार के हालिया निवेश समझौतों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि ₹22,500 करोड़ का निवेश करने वाली कंपनी की पूंजी महज ₹11 लाख है।

मुख्य बातें

  • तेजस्वी यादव ने परमाणु क्षेत्र में ₹22,500 करोड़ के एमओयू पर सवाल उठाए।
  • दावा किया गया कि निवेश करने वाली कंपनी की कुल पूंजी केवल ₹11 लाख है।
  • विपक्ष ने पिछले वर्षों के एमओयू की प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
  • सरकार पर 'पेपर कंपनियों' को सब्सिडी देने का आरोप लगाया गया।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार पर तीखा हमला बोला है। यादव ने हाल ही में बिहार सरकार द्वारा हस्ताक्षरित समझौतों (MoUs) की वैधता पर गंभीर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस कंपनी ने परमाणु क्षेत्र में ₹22,500 करोड़ के निवेश का वादा किया है, उसकी वास्तविक पूंजी महज ₹11 लाख है।

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संदेश जारी करते हुए कहा कि यह कंपनी इतनी भी सक्षम नहीं है कि एक घर की चार दीवारें खड़ी कर सके, लेकिन वह बिहार में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने का दावा कर रही है। उन्होंने इस घटनाक्रम को राज्य सरकार के लिए 'शर्मनाक' करार दिया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह राज्य में औद्योगिक नीति और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि निवेश के नाम पर केवल कागजी कंपनियां (Paper Companies) ही सामने आ रही हैं, तो इससे वास्तविक निवेशकों का भरोसा टूट सकता है।

"यह मामला सरकारी निगरानी और निवेश की जांच प्रक्रिया में बड़ी खामियों की ओर इशारा करता है।"

गौरतलब है कि 6 अगस्त को पटना में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में लगभग ₹51,600 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। इनमें 'ग्लोबल रिन्यूएबल एडवांस्ड क्लीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड' (GRACE) भी शामिल है, जिसने परमाणु क्षेत्र में भारी निवेश का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार, इसका पंजीकरण फरवरी 2026 में हुआ था और इसकी अधिकृत पूंजी बहुत कम है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बिहार में पिछले दो दशकों से एनडीए (NDA) का शासन रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इतने वर्षों के बावजूद राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल नहीं बन सका है, जिसके कारण बड़े उद्योगपति बिहार में आने से कतराते हैं।

क्या आप जानते हैं?: किसी भी कंपनी की 'अधिकृत पूंजी' (Authorized Capital) और 'प्रदत्त पूंजी' (Paid-up Capital) में बड़ा अंतर हो सकता है, जो अक्सर वित्तीय विश्लेषण में भ्रम पैदा करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. तेजस्वी यादव का मुख्य आरोप क्या है?
उनका आरोप है कि बिहार सरकार ने एक ऐसी कंपनी के साथ समझौता किया है जिसके पास निवेश करने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है।

2. विवादित कंपनी कौन सी है?
विवाद का केंद्र 'ग्लोबल रिन्यूएबल एडवांस्ड क्लीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड' है।