केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार से NICE प्रोजेक्ट को अपने नियंत्रण में लेने का आग्रह किया है, जिसमें टोल वसूली रोकने और भूमि अधिग्रहण संबंधी अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।
मुख्य बातें
- एच.डी. कुमारस्वामी ने NICE रोड प्रोजेक्ट को सरकार के पास वापस लेने की मांग की।
- हाई कोर्ट की टिप्पणियों के बाद टोल वसूली तुरंत रोकने का आग्रह किया गया।
- भूमि अधिग्रहण और मुआवजे में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
- मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहकर काम करेगी।
बेंगलुरु: केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने रविवार को कर्नाटक सरकार से एक महत्वपूर्ण मांग करते हुए कहा कि राज्य सरकार को पूरे NICE (नैरैक्स इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइज) प्रोजेक्ट को अपने नियंत्रण में ले लेना चाहिए। यह मांग कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा प्रोजेक्ट के प्रशासन और संचालन के संबंध में की गई हालिया कड़ी टिप्पणियों के बाद आई है।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन में कई कथित उल्लंघन हुए हैं। उन्होंने मांग की कि बेंगलुरु में NICE रोड पर टोल वसूली को तुरंत रोका जाना चाहिए और उचित कानून के माध्यम से सरकार को इस परियोजना का अधिग्रहण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और विधायी गृह समिति की सिफारिशों के अनुसार कार्य करना चाहिए।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, NICE प्रोजेक्ट का मुद्दा केवल बुनियादी ढांचे का नहीं बल्कि पारदर्शिता और किसानों के अधिकारों का भी है। यदि सरकार इस प्रोजेक्ट को टेकओवर करती है, तो यह कर्नाटक में निजी-सार्वजनिक भागीदारी (PPP) मॉडल के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
प्रोजेक्ट के प्रशासन में पारदर्शिता की कमी और किसानों को उचित मुआवजा न मिलना एक गंभीर कानूनी संकट पैदा कर सकता है।
मंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि NICE ने राज्य सरकार की बिना किसी अधिसूचना के टोल दरों में वृद्धि की है। इसके अलावा, 2003 और 2009 में किसानों से भूमि अधिग्रहित करने के बावजूद, कई प्रभावित भूस्वामियों का मुआवजा अभी भी तय होना बाकी है। सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही में भूमि अधिग्रहण के तरीके में कई अनियमितताओं का भी खुलासा हुआ है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
NICE रोड बेंगलुरु और मैसूर के बीच एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा कॉरिडोर है। इसे निजी भागीदारी के साथ विकसित किया गया था, लेकिन लंबे समय से इसके टोल ढांचे, भूमि उपयोग और किसानों के मुआवजे को लेकर कानूनी विवादों में रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एच.डी. कुमारस्वामी की मुख्य मांग क्या है?
उनकी मुख्य मांग है कि सरकार NICE प्रोजेक्ट को अपने नियंत्रण में ले ले और अवैध टोल वसूली को तुरंत बंद करे।
2. मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का इस पर क्या रुख है?
मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार कानून के दायरे में रहकर मामले की समीक्षा करेगी और जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, उसका पालन करेगी।