भाजपा ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए केरल के के. सुरेंद्रन और अनिल एंटनी को राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया है, जबकि ए.पी. अब्दुल्लाकुट्टी को राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची से बाहर कर दिया गया है।

  • के. सुरेंद्रन और अनिल एंटनी को भाजपा का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया।
  • राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ए.पी. अब्दुल्लाकुट्टी को सूची से हटाया गया।
  • नए प्रमुख नितिन नबीन के नेतृत्व में यह संगठनात्मक बदलाव किया गया।
  • केरल से किसी भी नेता को उपाध्यक्ष या महासचिव पद नहीं मिला।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने राष्ट्रीय संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव की घोषणा की है। दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तहत, केरल के पूर्व राज्य अध्यक्ष के. सुरेंद्रन और अनिल एंटनी को 16 नए राष्ट्रीय सचिवों में शामिल किया गया है। यह नियुक्तियां नए प्रमुख नितिन नबीन के नेतृत्व में की गई हैं।

के. सुरेंद्रन की नियुक्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। 2025 में राज्य अध्यक्ष पद से हटने के बाद, सुरेंद्रन लगातार संगठन में किसी उपयुक्त राष्ट्रीय पद की तलाश में थे। उनकी राष्ट्रीय सचिव के रूप में नियुक्ति यह दर्शाती है कि पार्टी अभी भी केरल में उनके जमीनी प्रभाव और संगठनात्मक कौशल को महत्व देती है।

वहीं, पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के पुत्र अनिल एंटनी के लिए यह एक बड़ी छलांग है। 2023 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले अनिल एंटनी, जो पहले कांग्रेस के डिजिटल मीडिया सेल के प्रमुख थे, ने पथनमथिट्टा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि वह चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उनकी नियुक्ति भाजपा की डिजिटल रणनीति और उनकी प्रोफाइल का उपयोग करने की इच्छा को दर्शाती है।

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, इन दोनों नेताओं का चयन केरल के जटिल राजनीतिक माहौल में पैठ बनाने की भाजपा की निरंतर कोशिशों का हिस्सा है। राज्य के नेताओं को राष्ट्रीय मंच पर लाकर, पार्टी केंद्र और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के बीच के अंतर को पाटने का प्रयास कर रही है। हालांकि, उपाध्यक्ष और महासचिव जैसे वरिष्ठ पदों पर केरल से किसी को जगह न मिलना यह संकेत देता है कि पार्टी सत्ता के वितरण में अभी भी सावधानी बरत रही है।

सुरेंद्रन और एंटनी का उत्थान केरल में गति बनाए रखने और राज्य इकाई के भीतर आंतरिक गुटबाजी को संतुलित करने का एक सोचा-समझा कदम है।

इस फेरबदल में कुछ नेताओं को झटका भी लगा है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे ए.पी. अब्दुल्लाकुट्टी को राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची से बाहर कर दिया गया है। इसे नए नेतृत्व द्वारा पार्टी के चेहरे और रणनीति को पूरी तरह से बदलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

केरल के कई अन्य प्रमुख नेताओं ने भी राष्ट्रीय पदों की उम्मीद की थी, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। सोमवार को घोषित सूची में 13 उपाध्यक्ष और आठ राष्ट्रीय महासचिव शामिल हैं, जिनमें से कोई भी केरल से नहीं है, जो राष्ट्रीय पदों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।

क्या आप जानते हैं?: अनिल एंटनी का कांग्रेस से भाजपा में जाना केरल की राजनीति में सबसे चर्चित घटनाओं में से एक था, क्योंकि उनके पिता ए.के. एंटनी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं।

इन नियुक्तियों के समय पार्टी के नए प्रमुख कौन हैं?
ये नियुक्तियां नए प्रमुख नितिन नबीन के नेतृत्व में की गई हैं।

केरल के किस प्रमुख नेता को राष्ट्रीय सूची से बाहर किया गया है?
पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ए.पी. अब्दुल्लाकुट्टी को राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची से बाहर कर दिया गया है।