कलबुरागी में भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य कैबिनेट मंत्री बी. नागेंद्र के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। फंड गबन के मामले में जांच जारी रहने के बावजूद उनकी कैबिनेट में वापसी पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
- भाजपा ने बी. नागेंद्र को तत्काल कैबिनेट से हटाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
- नागेंद्र पर महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के ₹89.63 करोड़ के गबन का आरोप है।
- पूर्व सांसद उमेश जाधव और अन्य नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर गलत मिसाल कायम करने का आरोप लगाया है।
कर्नाटक के कलबुरागी में सोमवार को राजनीतिक माहौल तब गरमा गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जिला इकाई ने राज्य कैबिनेट मंत्री बी. नागेंद्र के खिलाफ एक व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरदार वल्लभभाई पटेल चौक से उपायुक्त कार्यालय तक एक विशाल मार्च निकाला और सरकार विरोधी नारे लगाए। विरोध की तीव्रता तब और बढ़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त कार्यालय के सामने टायर जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण बी. नागेंद्र का राज्य कैबिनेट में पुन: शामिल होना है, जबकि उनके खिलाफ अनुसूचित जनजाति कल्याण कोष के दुरुपयोग का गंभीर मामला विचाराधीन है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को मंत्री पद पर बनाए रखना लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है।
क्यों है यह मामला गंभीर?
पूर्व सांसद उमेश जाधव, पूर्व विधायक दत्तत्रेय पाटिल रेवूर और अमरनाथ पाटिल ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए याद दिलाया कि बी. नागेंद्र ने जून 2024 में फंड गबन मामले के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इतना ही नहीं, उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार भी किया गया था, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली।
भाजपा नेताओं के अनुसार, नागेंद्र पर जाली चेक और आरटीजीएस (RTGS) लेनदेन के माध्यम से ₹89.63 करोड़ की राशि को डायवर्ट करने का आरोप है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच अभी भी जारी है, तो कांग्रेस सरकार ने उन्हें दोबारा कैबिनेट में शामिल करने का निर्णय क्यों लिया?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक में 'सुशासन' (Good Governance) की लड़ाई बन गया है। जब किसी आरोपी को राजनीतिक संरक्षण मिलता है, तो यह प्रशासनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कम करता है। भाजपा इस मुद्दे का उपयोग कांग्रेस सरकार की छवि को 'भ्रष्ट' साबित करने के लिए कर रही है।
"राजनीतिक नियुक्तियों में पारदर्शिता का अभाव और भ्रष्टाचार के आरोपियों को संरक्षण देना चुनावी वादों और प्रशासनिक नैतिकता का खुला उल्लंघन है।"
विरोध प्रदर्शन में भाजपा ग्रामीण जिला अध्यक्ष अशोक बगली और शहर इकाई के अध्यक्ष चंदू पाटिल ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नागेंद्र को तत्काल नहीं हटाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
1. बी. नागेंद्र पर क्या आरोप हैं?
उन पर जाली चेक और आरटीजीएस के माध्यम से ₹89.63 करोड़ के सरकारी फंड का दुरुपयोग करने का आरोप है।
2. भाजपा इस मुद्दे पर क्या मांग कर रही है?
भाजपा की मांग है कि जांच में बाधा न आए और नागेंद्र को तुरंत कैबिनेट से बर्खास्त किया जाए।