भाजपा सांसद बृज लाल ने 'दिमागी नक्सलियों' को जंगलों में रहने वाले उग्रवादियों से अधिक खतरनाक बताया है, जिस पर कांग्रेस ने इसे बुद्धिजीवियों को निशाना बनाने की साजिश करार दिया है।
- भाजपा सांसद बृज लाल ने 'दिमागी नक्सलियों' को समाज के लिए बड़ा खतरा बताया।
- इनमें प्रोफेसर, लेखक और एनजीओ प्रमुखों जैसे बुद्धिजीवियों को शामिल किया गया है।
- कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।
भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद और पूर्व आईपीएस अधिकारी बृज लाल ने हाल ही में एक वीडियो संदेश के जरिए 'दिमागी नक्सलियों' (Intellectual Naxals) के मुद्दे पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का हवाला देते हुए कहा कि ये लोग जंगलों में नहीं, बल्कि शहरों में रहते हैं और हथियारों के बजाय अपनी बुद्धि का उपयोग समाज को भ्रमित करने के लिए करते हैं।
सांसद बृज लाल के अनुसार, ये 'दिमागी नक्सली' प्रोफेसरों, शिक्षकों, एनजीओ नेताओं, कवियों और लेखकों के भेष में समाज में घुले-मिले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग लेखों, सम्मेलनों और सेमिनारों के माध्यम से युवाओं के मन में हिंसक विचारधारा का बीजारोपण कर रहे हैं। उनके मुताबिक, ये लोग पारंपरिक नक्सलियों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक हैं क्योंकि इनका प्रभाव व्यापक और सूक्ष्म होता है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि 'दिमागी नक्सली' शब्द का उपयोग केवल एक राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि यह राज्य और नागरिक समाज के बीच बढ़ते वैचारिक संघर्ष का संकेत है। जब शासन तंत्र बौद्धिक आलोचना को 'नक्सलवाद' के चश्मे से देखने लगता है, तो यह अकादमिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विमर्श के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा करता है।
"जब बौद्धिक विमर्श को सुरक्षा खतरे के रूप में परिभाषित किया जाता है, तो यह लोकतंत्र में स्वस्थ बहस की जगह भय के माहौल को जन्म दे सकता है।"
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने इसे भाजपा की 'तानाशाही मानसिकता' का हिस्सा बताया। कांग्रेस का तर्क है कि इस शब्दावली का उपयोग उन पत्रकारों, शिक्षाविदों और लेखकों को लक्षित करने और उन्हें चुप कराने के लिए किया जाएगा जो तर्क, तर्कसंगतता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करते हैं। कांग्रेस ने इसे देश के लिए एक 'खतरनाक संकेत' बताया है।
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने दशकों तक वामपंथी उग्रवाद (LWE) से संघर्ष किया है। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि जबकि भौतिक नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है, अब 'दिमागी नक्सलियों' की पहचान कर उन्हें अलग करना आवश्यक है ताकि 'विकसित भारत' के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 'दिमागी नक्सली' शब्द का अर्थ क्या है?
भाजपा के अनुसार, ये वे बुद्धिजीवी हैं जो बिना हथियार उठाए अपनी लेखनी और भाषणों के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थानों के प्रति अविश्वास पैदा करते हैं।
2. कांग्रेस ने इस पर क्या आपत्ति जताई है?
कांग्रेस का मानना है कि इस शब्द का उपयोग सरकार द्वारा उन लोगों को प्रताड़ित करने के लिए किया जाएगा जो सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं।