वरिष्ठ कांग्रेस नेता बी.के. हरिप्रसाद ने आरएसएस पर बिना पंजीकरण के अवैध रूप से संचालित होने का आरोप लगाते हुए इसकी तुलना तालिबान से की है। उन्होंने कर्नाटक सरकार से संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • बी.के. हरिप्रसाद ने आरएसएस को 'भारतीय तालिबान' और 'अंडरवर्ल्ड' संगठन करार दिया।
  • आरोप लगाया कि आरएसएस बिना सरकारी पंजीकरण और पुलिस अनुमति के शाखाएं चला रहा है।
  • कर्नाटक सरकार से बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने और आरएसएस की निगरानी करने की मांग।

बेंगलुरु में राजनीतिक माहौल तब गरमा गया जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और एमएलसी बी.के. हरिप्रसाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ तीखा हमला बोला। रविवार को प्रेस से बात करते हुए हरिप्रसाद ने आरएसएस को "भारत का तालिबान" बताते हुए कहा कि यह एक ऐसा संगठन है जो सरकार के साथ पंजीकृत नहीं है और कानून की अनदेखी कर रहा है।

हरिप्रसाद ने विशेष रूप से बेंगलुरु में आरएसएस द्वारा निकाली गई हालिया मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों जैसे पार्कों और मैदानों में किसी भी कार्यक्रम के आयोजन के लिए प्रशासन की अनुमति अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस वर्षों से बिना किसी कानूनी अनुमति के 'लाठियों और तलवारों' के साथ अपनी शाखाएं संचालित कर रहा है, जो कि पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है (Why This Matters)

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बयान केवल एक राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि कर्नाटक में वैचारिक ध्रुवीकरण की गहराई को दर्शाता है। जब एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि किसी घरेलू संगठन की तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी समूह (तालिबान) से करता है, तो यह राज्य में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संवाद के गिरते स्तर को उजागर करता है। यह हमला सीधे तौर पर आरएसएस की वैधता और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।

"राजनीतिक विमर्श में इस तरह की चरम शब्दावली का उपयोग अक्सर चुनावी ध्रुवीकरण को तेज करने के लिए किया जाता है, जिससे जमीनी स्तर पर तनाव बढ़ सकता है।"

हरिप्रसाद ने आगे कहा कि आरएसएस एक "अंडरवर्ल्ड" संगठन की तरह काम कर रहा है। उन्होंने तमिलनाडु सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आरएसएस सदस्यों के खिलाफ गिरफ्तारियां और कानूनी मामले दर्ज किए गए हैं, और कर्नाटक सरकार को भी इसी तरह का कड़ा रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने खुलासा किया कि कई मंत्रियों ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर राज्य में आरएसएस की गतिविधियों की निगरानी करने का अनुरोध किया है।

ऐतिहासिक रूप से, कांग्रेस और आरएसएस के बीच वैचारिक संघर्ष दशकों पुराना है। कर्नाटक में कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हरिप्रसाद ने सरकार से पूछा कि आखिर इस वादे को पूरा करने में देरी क्यों हो रही है।

क्या आप जानते हैं?: आरएसएस की स्थापना 1925 में डॉ. के.बी. हेडगेवार द्वारा की गई थी और यह दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: बी.के. हरिप्रसाद ने आरएसएस की तुलना तालिबान से क्यों की?
उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस बिना पंजीकरण के और बिना पुलिस अनुमति के अपनी गतिविधियां चलाता है, जो उनके अनुसार गैर-जिम्मेदाराना और अवैध है।

प्रश्न 2: क्या कर्नाटक सरकार ने बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाया है?
नहीं, हालांकि कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में इसका वादा किया था, लेकिन वर्तमान में कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।