कर्नाटक विधान परिषद ने उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन के बाद आयोजन स्थल पर किए गए 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान को संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

  • कर्नाटक विधान परिषद ने 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया।
  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन के बाद हल्द्वानी में किया गया था हवन।
  • प्रस्ताव में इस कृत्य को 'मनुवादी' मानसिकता और छुआछूत का अभ्यास बताया गया है।

बेंगलुरु: कर्नाटक विधान परिषद ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन के बाद आयोजन स्थल के 'अनुष्ठानिक शुद्धिकरण' की कड़े शब्दों में निंदा की। इस प्रस्ताव को हंगामे के बीच ध्वनि मत से पारित किया गया।

कांग्रेस एमएलसी एच जक्कप्पनवर द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में कहा गया कि जिस स्थान पर डॉ. मल्लिकार्जुन खड़गे ने खड़े होकर भाषण दिया, वहां 'शुद्धिकरण' के लिए होम और हवन करना संवैधानिक मूल्यों का घोर उल्लंघन है। प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि 'मनुवादियों' ने सार्वजनिक रूप से छुआछूत का अभ्यास किया है और भारत के संविधान का अपमान किया है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह घटना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव के गहरे घावों को उजागर करती है। जब देश के एक वरिष्ठ राजनेता और दलित समुदाय से आने वाले व्यक्ति के भाषण के बाद किसी स्थान को 'शुद्ध' करने की आवश्यकता महसूस की जाती है, तो यह दर्शाता है कि समाज के कुछ हिस्सों में आज भी जातिगत श्रेष्ठता की भावना मौजूद है। यह मामला अब राजनीतिकरण से ऊपर उठकर मानवाधिकारों और संवैधानिक गरिमा का मुद्दा बन गया है।

"सार्वजनिक मंचों पर जाति आधारित शुद्धिकरण की कोशिशें लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार हैं और समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन हैं।"

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई, जहां खड़गे ने एक जनसभा को संबोधित किया था। रिपोर्टों के अनुसार, 10 अगस्त को एक दक्षिणपंथी समूह द्वारा वहां 'शुद्धिकरण हवन' आयोजित किया गया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि इस कृत्य ने उन्हें 'छुआछूत की चुभन' महसूस कराई है।

परिषद की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने भारी विरोध जताया। भाजपा सदस्यों ने मंत्री बी नागेंद्र के कथित वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले में शामिल होने के मुद्दे पर उनके इस्तीफे की मांग की। भाजपा एमएलसी ने आरोप लगाया कि नागेंद्र की कैबिनेट में पुन: नियुक्ति अनुसूचित जनजाति समुदाय के साथ विश्वासघात है।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 'अस्पृश्यता' (Untouchability) का उन्मूलन करता है और किसी भी रूप में इसका अभ्यास दंडनीय अपराध है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कर्नाटक परिषद ने किस बात की निंदा की?
परिषद ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद आयोजन स्थल पर किए गए 'शुद्धिकरण हवन' की निंदा की है।

2. इस प्रस्ताव को किसने पेश किया था?
यह प्रस्ताव कांग्रेस एमएलसी एच जक्कप्पनवर द्वारा पेश किया गया था।