असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बफ़र ज़ोन को न्यूनतम 1 किमी तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे पर्यावरणविदों और नागरिक समाज में तीखा विरोध उभरा है। यह कदम राज्य के शहरी विकास को प्रोत्साहित करने के नाम पर उठाया गया है, परन्तु संरक्षण के दृष्टिकोण से गंभीर प्रश्न उठाता है।
मुख्य बिंदु
- असम सरकार 10 किमी के मानक ESZ को 1 किमी तक घटाने की इच्छा रखती है।
- पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह संरक्षण को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने पहले समान मामलों में ESZ की न्यूनतम सीमा पर निर्णय दिया है।
पृष्ठभूमि
इको‑सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) 2002 में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा स्थापित किया गया था, ताकि राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के चारों ओर एक बफ़र क्षेत्र बनाकर मानवीय गतिविधियों के प्रभाव को कम किया जा सके। 2011 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्यों को साइट‑विशिष्ट प्रस्ताव दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें सामान्यतः 10 किमी की सीमा निर्धारित की गई थी।
काजीरंगा, जो एक एक-सींग वाले गैंडे के लिए विश्व प्रसिद्ध है, वर्तमान में इस डिफ़ॉल्ट 10 किमी के ESZ के तहत कार्य कर रहा है, क्योंकि अभी तक कोई विशेष नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी के डिपोर बील (रामसर साइट) के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि बोकाखट, कालीबोर आदि पड़ोसी शहरों के विकास को बाधित न करने के लिए 1 किमी का बफ़र पर्याप्त होगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that reducing the ESZ around Kaziranga could accelerate urban sprawl, increase human‑wildlife conflicts, and undermine decades‑long conservation gains, potentially jeopardizing the park’s UNESCO World Heritage status.
"काजीरंगा का 1 किमी ESZ वन्यजीवों के आवास को अपर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेगा," कहा डॉ. अनीता सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ।
Frequently Asked Questions
- क्या 1 किमी का ESZ कानूनी रूप से संभव है? हाँ, यदि राज्य सरकार की साइट‑स्पेसिफिक नोटिफिकेशन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मंजूर हो जाए।
- काजीरंगा के लिए छोटा ESZ क्या जोखिम पैदा करेगा? यह वन्यजीवों के आवास में व्यवधान, मानव‑जीव संघर्ष बढ़ाने और पर्यटन आय में संभावित गिरावट का कारण बन सकता है।