तमिलनाडु की राजनीति में जहाँ DMK और AIADMK का दबदबा रहा है, वहीं अब एक अकेला विधायक एम. भोजराजन सीएम विजय की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। नीट (NEET) और परिसीमन जैसे मुद्दों पर उन्होंने पूरी विधानसभा के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है।
- एम. भोजराजन तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा के एकमात्र विधायक हैं।
- उन्होंने NEET को खत्म करने और विदेशी अंशदान विनियमन विधेयक (FCRA) के विरोध के खिलाफ मतदान किया।
- वह 17वीं विधानसभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और ऊटी (उधगमंडलम) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
तमिलनाडु विधानसभा, जो दशकों से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्नाद्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच राजनीतिक युद्ध का मैदान रही है, अब एक नए और अनोखे परिदृश्य की गवाह बन रही है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार को जहाँ मुख्य विपक्षी दल कुछ मुद्दों पर साथ दे रहे हैं, वहीं एक अकेला व्यक्ति पूरी सरकार और विपक्ष के खिलाफ खड़ा है।
यह व्यक्ति हैं एम. भोजराजन, जो 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एकमात्र विधायक हैं। भोजराजन ने हालिया सत्र के दौरान सरकार द्वारा लाए गए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया है। आश्चर्यजनक बात यह है कि जहाँ DMK और AIADMK ने कुछ विवादास्पद प्रस्तावों पर सरकार का समर्थन किया, वहीं भोजराजन ने अकेले विरोध का रास्ता चुना।
भोजराजन का राजनीतिक सफर और पृष्ठभूमि
1946 में जन्मे 79 वर्षीय भोजराजन नीलगिरी क्षेत्र के चाय अर्थव्यवस्था से गहरे जुड़े हुए हैं। उनकी पहचान एक बागान मालिक, वकील और व्यवसायी के रूप में है। उन्होंने ऊटी के गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज से पढ़ाई की और बाद में मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री ली। राजनीति में आने से पहले वे कांग्रेस से जुड़े थे, लेकिन 2014 के आसपास उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। 2021 के चुनाव में हारने के बाद, उन्होंने इस बार उधगमंडलम सीट से 976 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की।
विवाद के मुख्य मुद्दे और विरोध का तरीका
भोजराजन का सबसे बड़ा विरोध NEET परीक्षा को लेकर दिखा। जब विजय सरकार ने केंद्र से NEET को खत्म करने और 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश देने का प्रस्ताव रखा, तो भोजराजन ने तर्क दिया कि परीक्षा को खत्म करने के बजाय राज्य को कोचिंग सुविधाओं को मजबूत करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने सदन से वॉकआउट किया।
इसी तरह, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर भी उन्होंने केंद्र का बचाव किया और राज्य सरकार के विरोध प्रस्ताव का विरोध किया। उनका तर्क था कि विदेशी चंदे का विनियमन जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that M Bhojarajan's stance is not just about party loyalty, but a strategic attempt to keep the Nationalistic (BJP) narrative alive in a state dominated by Dravidian ideology. By opposing the consensus of TVK, DMK, and AIADMK, he is positioning himself as the sole guardian of Central Government policies in the Tamil Nadu House, effectively turning a numerical weakness into a moral and ideological spotlight.
"In a house of 234 members, being a lone dissenter requires immense political courage and a clear ideological anchor."
परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर भी भोजराजन ने सदन से अलग राह चुनी। जहाँ सरकार मौजूदा लोकसभा सीटों के वितरण को फ्रीज करने की मांग कर रही है, वहीं भोजराजन का रुख केंद्र की नीतियों के अनुरूप रहा है।
| मुद्दा | TVK/DMK/AIADMK का रुख | एम. भोजराजन (BJP) का रुख |
|---|---|---|
| NEET परीक्षा | खत्म करने की मांग | कोचिंग सुधारने का सुझाव |
| FCRA विधेयक | वापसी की मांग | केंद्र का समर्थन |
| परिसीमन | सीटों को फ्रीज करने की मांग | केंद्र की नीति का समर्थन |
Frequently Asked Questions
1. एम. भोजराजन कौन हैं?
वह तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा के एकमात्र विधायक हैं और उधगमंडलम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
2. उन्होंने सरकार का विरोध क्यों किया?
उन्होंने NEET और FCRA जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन किया, जबकि राज्य सरकार और अन्य क्षेत्रीय दल उनके विरोध में थे।