कांग्रेस ने दावा किया है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी एकता ने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया, जिससे परिसीमन सहित पांच महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित होने से रोका गया।

  • विपक्ष ने परिसीमन और 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' जैसे 5 महत्वपूर्ण विधेयकों को रोकने में सफलता पाई।
  • कांग्रेस ने पीएम मोदी और अमित शाह पर सत्र के दौरान जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।
  • INDIA गठबंधन की दैनिक बैठकों ने संसदीय रणनीति को मजबूत किया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गुरुवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की अभूतपूर्व एकजुटता से 'डरी और घबराई' हुई थी। कांग्रेस का तर्क है कि विपक्षी दलों के बीच समन्वय ने सरकार को कई विवादास्पद विधायी उपायों को जबरन थोपने से रोक दिया।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सत्र के अधिकांश समय संसद से दूर रहे और केवल समापन समारोह के लिए उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि सांसदों और विपक्ष के नेता (LoP) के सवालों का जवाब देना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है, लेकिन नेतृत्व ने इस जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

विपक्ष की 5 बड़ी जीतें

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन पांच प्रमुख मोर्चों का विवरण दिया जहां विपक्ष सफल रहा:

विधेयक/मुद्दापरिणाम
परिसीमन (Delimitation) Billदो-तिहाई बहुमत न होने के कारण रुका
एक राष्ट्र, एक चुनाव (One Nation, One Election)सर्दियों के सत्र तक स्थगित
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025रिपोर्ट न होने के कारण पेश नहीं हुआ
FCRA संशोधन विधेयकसंयुक्त समिति को भेजा गया
पीएम/सीएम की गिरफ्तारी पर स्वतः हटाना Billरिपोर्ट तैयार न होने के कारण विफल

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह सत्र भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह दर्शाता है कि जब INDIA गठबंधन एक साझा रणनीति के तहत काम करता है, तो वह सरकार के विधायी एजेंडे को चुनौती देने में सक्षम है। यह केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि संसदीय प्रक्रियाओं के रणनीतिक उपयोग का परिणाम है।

"संसदीय लोकतंत्र में जब विपक्ष एकजुट होता है, तो वह सरकार को निरंकुश होने से रोकने के लिए एक प्रभावी अवरोधक के रूप में कार्य करता है।"

हालांकि, जयराम रमेश ने स्वीकार किया कि 'खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' और 'राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026' बिना किसी चर्चा के पारित हो गए, जिसे उन्होंने असंवैधानिक करार दिया और कहा कि ये मामले अंततः अदालत जाएंगे।

क्या आप जानते हैं? 2015 का मानसून सत्र व्यापम घोटाले के कारण पूरी तरह बाधित हो गया था, और 11 साल बाद फिर से युवाओं से जुड़े मुद्दों ने संसद में भारी हंगामा पैदा किया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: परिसीमन विधेयक क्यों पारित नहीं हो सका?
उत्तर: क्योंकि संविधान संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान में सरकार के पास नहीं है।

प्रश्न 2: 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक का क्या हुआ?
उत्तर: विपक्ष के कड़े सवालों और JPC रिपोर्ट के अभाव में इसे शीतकालीन सत्र तक के लिए टाल दिया गया है।