महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन के दौरान 2.07 करोड़ से अधिक फॉर्म जमा नहीं हो पाए हैं, जिससे लाखों वोटरों के नाम कटने का खतरा है। एनसीपी-एसपी के रोहित पवार ने इस प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप और फर्जी सर्वे के गंभीर आरोप लगाए हैं।

  • महाराष्ट्र के कुल मतदाताओं का 21.25% (2.07 करोड़) अनकलेक्टेड फॉर्म के कारण सूची से बाहर हो सकते हैं।
  • राज्य चुनाव आयोग के अनुसार 33.9 लाख मृतक, 63.6 लाख अप्राप्य और 71.9 लाख स्थानांतरित मतदाता हैं।
  • रोहित पवार का आरोप है कि बीएलओ (BLO) ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के कहने पर 'डेस्क सर्वे' किया।
  • ठाणे, मुंबई और पुणे जैसे शहरी जिलों में फॉर्म न मिलने की दर सबसे अधिक है।

17 अगस्त, 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) अभ्यास के दौरान 2.07 करोड़ से अधिक मतदाता गणना फॉर्म (Enumeration Forms) अभी भी अनकलेक्टेड हैं। राज्य के कुल 9.78 करोड़ मतदाताओं में से राज्य चुनाव आयोग (SEC) केवल 7.69 करोड़ (78.64%) का डिजिटलीकरण कर पाया है, जबकि 21.25% मतदाताओं के नाम फॉर्म जमा न होने के कारण हटा दिए गए हैं।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, हटाए गए मतदाताओं में 33,94,053 मृतक, 63,61,113 अप्राप्य (untraceable), 71,95,388 स्थायी रूप से स्थानांतरित और 1,43,556 अन्य शामिल हैं। यह अभ्यास आखिरी बार 2002 में किया गया था। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आंतरिक प्रवास के कारण मतदाता सूची में मौजूद डुप्लिकेट और पुराने नामों को हटाने के लिए इसे फिर से शुरू किया है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी केंद्रों में अनकलेक्टेड फॉर्म की भारी संख्या प्रशासनिक विफलता या सोची-समझी रणनीति की ओर इशारा करती है। जब ठाणे जैसे जिले में 10 में से लगभग 4 मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाया, तो यह चुनावी सूची की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और बड़े पैमाने पर शहरी मतदाताओं के मताधिकार छिनने का जोखिम पैदा करता है।

इस मुद्दे पर एनसीपी-एसपी नेता रोहित पवार ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने दावा किया कि बीएलओ (BLO) पर सत्यापन कार्य पूरा करने का इतना दबाव था कि उन्होंने जमीनी स्तर पर जाने के बजाय ऑफिस में बैठकर ही 'डेस्क सर्वे' कर लिए। पवार का आरोप है कि पुणे, नासिक और ठाणे में यह कार्य बीजेपी कार्यकर्ताओं के इनपुट के आधार पर किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी ने मतदाताओं को उनकी विचारधारा के आधार पर वर्गीकृत करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया था।

लोकतंत्र की शुद्धता मतदाता सूची की सटीकता पर टिकी होती है; 'डेस्क-आधारित' सत्यापन की कोई भी आशंका निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद को हिला सकती है।

आंकड़ों से पता चलता है कि 94.47 लाख मतदाताओं के फॉर्मों में से 45.4% अनकलेक्टेड फॉर्म शहरी जिलों में थे। इसमें ठाणे की हिस्सेदारी सबसे अधिक (38.77%) रही, उसके बाद मुंबई (37.57%), मुंबई उपनगर (34.48%) और पुणे (31.92%) का स्थान रहा।

जिला अनकलेक्टेड फॉर्म प्रतिशत
ठाणे 38.77%
मुंबई 37.57%
मुंबई उपनगर 34.48%
पुणे 31.92%

रोहित पवार ने कहा कि वह सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों से मतदाता सूची का डेटा प्राप्त कर रहे हैं और उसकी तुलना चुनाव आयोग की प्रारंभिक सूची से कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन मतदाताओं को जानबूझकर हटाया गया है।

क्या आप जानते हैं?: विशेष गहन संशोधन एक दुर्लभ प्रक्रिया है जो दशकों में एक बार की जाती है ताकि प्रवास के कारण बने 'घोस्ट वोटर्स' और डुप्लिकेट प्रविष्टियों को पूरी तरह साफ किया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: विशेष गहन संशोधन (SIR) क्या है?
यह चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अपडेट करने की एक व्यापक प्रक्रिया है, जिसमें मृतक, स्थानांतरित या डुप्लिकेट मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं।

प्रश्न 2: इस अभ्यास में शहरी क्षेत्र अधिक प्रभावित क्यों हैं?
मुंबई और पुणे जैसे शहरों में आंतरिक प्रवास की उच्च दर के कारण बीएलओ के लिए मतदाताओं को ट्रैक करना कठिन हो जाता है, जिससे 'अप्राप्य' मतदाताओं की संख्या बढ़ जाती है।