महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने चुनावी कदाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि छह निर्वाचन क्षेत्रों में 56,000 से अधिक डुप्लिकेट वोटरों के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जबकि उनका वोट शेयर बढ़ा था।

  • पृथ्वीराज चव्हाण ने महाराष्ट्र के छह निर्वाचन क्षेत्रों में 56,118 डुप्लिकेट वोटरों का आरोप लगाया है।
  • केवल करड़ दक्षिण में, 21,132 व्यक्तियों को कथित तौर पर 48,741 बार पंजीकृत किया गया।
  • पूर्व सीएम का दावा है कि भाजपा ने प्रति बूथ 10% मतदाता बढ़ाने की रणनीति अपनाई।
  • चुनाव परिणामों को चुनौती देने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने 2024 के विधानसभा चुनावों में व्यापक चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाकर एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। एक विशेष खुलासे में, चव्हाण ने दावा किया कि मतदाता सूचियों के सूक्ष्म विश्लेषण से उनके अपने करड़ दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र और पांच पड़ोसी क्षेत्रों में 56,118 डुप्लिकेट मतदाता पाए गए हैं।

दिग्गज नेता ने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। चव्हाण के अनुसार, यह विसंगति केवल लिपिकीय त्रुटि नहीं है, बल्कि परिणामों में हेरफेर करने का एक व्यवस्थित प्रयास है। उन्होंने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया: उनके निर्वाचन क्षेत्र में अकेले 21,132 मतदाता 48,741 बार पंजीकृत थे, जिनमें से कुछ व्यक्ति एक ही नाम और पिता के नाम के साथ 15 बार तक दिखाई दिए, लेकिन उनके EPIC नंबर अलग थे।

स्थिति की गंभीरता को समझाने के लिए, चव्हाण ने विशिष्ट उदाहरण दिए, जैसे कि एक 29 वर्षीय महिला और एक 18 वर्षीय लड़की का नाम दो बार आना, और 'पाटिल सचिन शिवाजी' जैसे नाम का 15 बार दिखाई देना। उन्होंने तर्क दिया कि प्राकृतिक जनसांख्यिकीय स्थिति में ऐसी पुनरावृत्तियां असंभव हैं, और इसकी तुलना इस बात से की कि एक ही निर्वाचन क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कई संस्करण कैसे हो सकते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह आरोप लोकतांत्रिक वैधता की जड़ों पर प्रहार करता है। यदि किसी उम्मीदवार का वोट शेयर बढ़ता है—जैसा कि चव्हाण के मामले में हुआ, जिनके वोट 2019 में 92,296 से बढ़कर 2024 में 1,00,150 हो गए—फिर भी वे हार जाते हैं, तो यह विपक्षी वोटों की कृत्रिम वृद्धि की ओर इशारा करता है। यह एक खतरनाक मिसाल कायम करता है जहाँ 'वोटर इंजीनियरिंग' वास्तविक जनमत पर हावी हो सकती है।

मतदाता सूचियों का मशीन-रीडेबल फॉर्मेट से केवल पीडीएफ फॉर्मेट में बदलना उम्मीदवारों के लिए चुनावी रोल का स्वतंत्र ऑडिट करना बेहद कठिन बना देता है।

चव्हाण ने इस वृद्धि को सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सितंबर 2024 में दिए गए कथित निर्देशों से जोड़ा, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर हर बूथ पर वोट 10% बढ़ाने के लिए कहा गया था। चव्हाण ने उल्लेख किया कि जबकि भारत में औसत वार्षिक मतदाता वृद्धि दर 0.9% है, महाराष्ट्र में पांच महीने की अवधि में अचानक आई यह वृद्धि मतदाता सूचियों की कृत्रिम वृद्धि का संकेत देती है।

इस डेटा को उजागर करने की प्रक्रिया काफी कठिन थी। चव्हाण ने बताया कि चूंकि चुनाव आयोग केवल पीडीएफ फॉर्मेट में सूचियां प्रदान करता है, इसलिए उनकी टीम को विश्लेषण करने के लिए हजारों पन्नों को मैन्युअल रूप से एक्सेल शीट में बदलना पड़ा। उन्होंने अब यह सबूत जिला कलेक्टर को सौंप दिए हैं और बॉम्बे हाई कोर्ट में एक औपचारिक याचिका दायर की है।

क्या आप जानते हैं?: EPIC (इलेक्टोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड) को प्रत्येक नागरिक के लिए एक अद्वितीय पहचानकर्ता के रूप में डिज़ाइन किया गया है, फिर भी इन आरोपों से पता चलता है कि एक व्यक्ति के लिए कई आईडी बनाना संभव हो सकता है।
मानक 2019 चुनाव 2024 चुनाव
पृथ्वीराज चव्हाण के वोट 92,296 1,00,150
वोट वृद्धि - +9,130 (लगभग 10%)
परिणाम जीत/प्रतिस्पर्धी हार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पृथ्वीराज चव्हाण ने यह मुद्दा 2026 में क्यों उठाया?
उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग द्वारा मशीन-रीडेबल डेटा न दिए जाने के कारण उनकी टीम को विश्लेषण के लिए पीडीएफ सूचियों को एक्सेल में बदलने में काफी समय लगा।

प्रश्न 2: इन डुप्लिकेट वोटरों के संबंध में क्या कार्रवाई की गई है?
डेटा को विशेष गहन संशोधन (SIR) के लिए जिला कलेक्टर को सौंप दिया गया है और बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है।