मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के पहले 100 दिनों ने तमिलनाडु की प्रशासनिक मशीनरी में एक असामान्य हलचल पैदा की है। जहां राजनीतिक अनुभव की कमी के कारण भ्रष्टाचार में अस्थायी गिरावट आई है, वहीं स्थायी सुधारों पर सवाल बरकरार हैं।
- नए राजनीतिक वर्ग के पास पुराने तंत्र की कमी होने के कारण दृश्य भ्रष्टाचार में कमी आई है।
- संस्थागत अनुभव के मामले में नौकरशाहों का पलड़ा मंत्रियों की तुलना में भारी है।
- मुख्यमंत्री विजय का शासन 'इवेंट-ड्रिवेन' है, जिसमें अचानक निरीक्षणों पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
- विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण कर पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के प्रशासन के पहले सौ दिन एक अनूठे राजनीतिक प्रयोग की तरह हैं। दशकों बाद, एक शक्तिशाली और पुरानी प्रशासनिक मशीनरी की कमान एक ऐसे राजनीतिक वर्ग—TVK (तमिलगा वेट्री कझगम)—के हाथों में है, जिसे राज्य की सत्ता चलाने का लगभग कोई अनुभव नहीं है। अनुभव के इस अभाव ने फोर्ट सेंट जॉर्ज के गलियारों में एक अस्थिर लेकिन दिलचस्प माहौल पैदा कर दिया है।
इस अनुभवहीनता का सबसे आश्चर्यजनक परिणाम भ्रष्टाचार में आई गिरावट है। वरिष्ठ सरकारी सचिवों का कहना है कि तमिलनाडु में भ्रष्टाचार केवल व्यक्तिगत लालच नहीं था, बल्कि एक व्यवस्थित संचालन था जिसके लिए विशेष 'कौशल' और रसद की आवश्यकता होती थी। चूंकि TVK मंत्रियों के पास न तो पुराना 'पार्टी फंड' तंत्र था और न ही रिश्वत मांगने के नेटवर्क, इसलिए भ्रष्टाचार का चक्र फिलहाल थम गया है। अधिकारी अब रिश्वत मांगने से कतरा रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका उनसे हिस्सा नहीं मांग रहे हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भ्रष्टाचार में वर्तमान गिरावट नीतिगत जीत के बजाय 'अज्ञानता' का परिणाम हो सकती है। विजय सरकार के लिए असली चुनौती यह होगी कि क्या वह इस ईमानदारी को एक संस्थागत रूप दे पाती है, इससे पहले कि नया राजनीतिक वर्ग उन 'कौशलों' को सीख ले जिन्होंने उनके पूर्ववर्तियों को भ्रष्ट बनाया था। इवेंट-आधारित शासन से सिस्टम-आधारित शासन की ओर बढ़ना सबसे बड़ी बाधा है।
हालांकि, अनुभव की इस कमी ने नौकरशाही के प्रभाव को बढ़ा दिया है। वर्तमान में, शीर्ष अधिकारियों के पास वह संस्थागत ज्ञान है जो मंत्रियों के पास नहीं है, जिससे राजनीतिक कार्यपालिका के लिए जटिल विभागीय प्रस्तावों को चुनौती देना कठिन हो गया है। इससे एक ऐसा तनावपूर्ण माहौल बना है जहां अधिकारी और मंत्री दोनों मुख्यमंत्री से एक-दूसरे की शिकायत कर रहे हैं।
"भ्रष्टाचार के लिए भी कौशल की आवश्यकता होती है; वर्तमान गिरावट नए शासन की शुरुआती परेशानी का परिणाम है, न कि कोई स्थायी इलाज।"
मुख्यमंत्री विजय ने उच्च-दृश्यता वाली कार्रवाइयों के माध्यम से नौकरशाही की जड़ता को तोड़ने की कोशिश की है। चेन्नई में दलित छात्रावासों के औचक दौरों से लेकर एगमोर चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के निरीक्षण तक, उनका दृष्टिकोण 'तत्काल सरकार' (instant government) प्रदान करने पर केंद्रित है। हालांकि इन दौरों से तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन आलोचकों का तर्क है कि बिना डेटा-ड्रिवेन डैशबोर्ड के, ये प्रयास केवल अच्छी तस्वीरों वाली आपातकालीन कार्रवाइयां बनकर रह जाएंगे।
इन चुनौतियों के बावजूद, प्रगतिशील पारदर्शिता के संकेत मिले हैं। विधानसभा की कार्यवाही, जिसमें प्रश्नकाल भी शामिल है, का सीधा प्रसारण करने का निर्णय अतीत से एक बड़ा बदलाव है। यह कदम सरकार को वास्तविक समय में जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जो विजय की एक खुली सरकार की इच्छा को दर्शाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: विजय सरकार के तहत भ्रष्टाचार क्यों कम हुआ है?
उत्तर: इसका मुख्य कारण नए मंत्रियों के पास व्यवस्थित रिश्वतखोरी के लिए आवश्यक अनुभव और पुराने नेटवर्कों का अभाव है।
प्रश्न 2: मुख्यमंत्री विजय की शासन शैली की मुख्य आलोचना क्या है?
उत्तर: उनकी आलोचना 'इवेंट-ड्रिवेन गवर्नेंस' के लिए की जाती है, जहां दीर्घकालिक प्रणालीगत सुधारों के बजाय औचक दौरों के माध्यम से तात्कालिक परिणाम प्राप्त किए जाते हैं।