कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर लोकतंत्र और असहमति के अधिकार पर हमले का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच महीनों में लगभग 1.95 लाख सोशल मीडिया पोस्ट ब्लॉक करने के आदेश दिए गए हैं।

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर 5 महीनों में 1.95 लाख सोशल मीडिया ब्लॉकिंग आदेश जारी करने का आरोप लगाया।
  • दावा किया गया कि आदेशों की दर हर 68 सेकंड में एक थी।
  • छात्रों और युवाओं को निशाना बनाने का आरोप, विशेष रूप से NEET पेपर लीक के बाद।
  • सोशल मीडिया पर महिलाओं को ऑनलाइन उत्पीड़न और धमकी का सामना करना पड़ रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को केंद्र की मोदी सरकार पर लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया। खड़गे ने कहा कि सरकार ने नागरिकों के सवाल पूछने और असहमति जताने के लोकतांत्रिक अधिकार पर एक "बेशर्म और सुनियोजित हमला" किया है।

खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंधों के आंकड़ों को साझा करते हुए दावा किया कि केवल पांच महीनों के भीतर केंद्र सरकार ने लगभग 1.95 लाख सोशल मीडिया ब्लॉकिंग आदेश जारी किए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये आदेश अपराधियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उन छात्रों और युवाओं के खिलाफ हैं जो NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि डिजिटल स्पेस में सेंसरशिप बढ़ती है, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। खड़गे के अनुसार, सरकार ने कंटेंट हटाने की प्रतिक्रिया समय को घटाकर केवल तीन घंटे कर दिया है और इस प्रक्रिया को इतना स्वचालित (automated) बना दिया है कि बिना मानवीय समीक्षा के ही सामग्री हटाई जा रही है।

"मोदी सरकार ने हर भारतीय के बोलने और सवाल पूछने के लोकतांत्रिक अधिकार पर अब तक का सबसे निर्लज्ज हमला किया है।" - मल्लिकार्जुन खड़गे

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि जहाँ प्रदर्शनकारियों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, वहीं उनके समर्थन में किए गए सोशल मीडिया पोस्ट को सरकारी आदेशों के माध्यम से "व्यवस्थित रूप से मिटाया" जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार और आम नागरिक जो सरकार की आलोचना करते हैं, उन्हें तुरंत कंटेंट हटाने, FIR की धमकी और समन्वित डराने-धमकाने का सामना करना पड़ता है।

ऐतिहासिक संदर्भ

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों के माध्यम से सोशल मीडिया मॉडरेशन और सरकारी हस्तक्षेप का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सामग्री हटाने के आदेशों में वृद्धि देखी गई है, जिसे अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बहस के रूप में देखा जाता है।

Did You Know?: खड़गे के दावों के अनुसार, मार्च से जुलाई के बीच जारी किए गए ब्लॉकिंग आदेशों में से आधे से अधिक आदेश Instagram को भेजे गए थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. खड़गे ने सरकार पर क्या मुख्य आरोप लगाया है?
खड़गे ने आरोप लगाया है कि सरकार सोशल मीडिया के माध्यम से असहमति की आवाजों को दबा रही है और छात्रों की आवाज को कुचल रही है।

2. ब्लॉकिंग आदेशों की दर क्या थी?
दावे के अनुसार, सरकार ने हर 68 सेकंड में एक ब्लॉकिंग आदेश जारी किया है।