कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जाति जनगणना को जानबूझकर विफल करने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर बार-बार अपने स्टैंड को बदला है।
- कांग्रेस ने पीएम मोदी को 'यू-टर्न उस्ताद' बताते हुए जाति जनगणना में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
- जयरम रमेश ने 2021 के सुप्रीम कोर्ट हलफनामे का हवाला देते हुए 'ड्रॉप-डाउन मेनू' की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए।
- विपक्ष का दावा है कि 2027 की जनगणना में जाति डेटा को जानबूझकर हटाया जा रहा है।
नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयरम रमेश ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार जाति जनगणना को पूरी तरह से बाधित करना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ने खुद 2021 में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर जाति चयन के लिए 'ड्रॉप-डाउन मेनू' की आवश्यकता बताई थी, तो 2027 की आगामी जनगणना में इसे क्यों शामिल नहीं किया जा रहा है?
जयरम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विस्तार से बताते हुए कहा कि 21 सितंबर 2021 को सरकार ने जाति जनगणना की मांग को खारिज किया था, लेकिन उसी हलफनामे के पैरा 12(d) में स्वीकार किया गया था कि 2011 की जनगणना से पहले जातियों की कोई रजिस्ट्री नहीं थी। सरकार ने माना था कि यदि जातियों के चयन के लिए एक ड्रॉप-डाउन मेनू होता, तो अधिक सटीक और विश्वसनीय डेटा उपलब्ध हो पाता।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the caste census has become a central political battlefield in India. By controlling the methodology of the 2027 Census, the ruling party can effectively influence the narrative around social quotas and representation. The demand for a 'drop-down menu' is not just a technicality but a move to prevent the misclassification of castes, which often happens in open-text entries.
जाति जनगणना केवल डेटा का खेल नहीं है, बल्कि यह आने वाले दशकों के राजनीतिक समीकरणों और आरक्षण नीतियों को निर्धारित करने वाला सबसे शक्तिशाली उपकरण है।
कांग्रेस ने यह भी याद दिलाया कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में जाति सर्वेक्षण के दौरान ऐसे मेनू का उपयोग किया गया था। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 5 मई 2025 को प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में भी इसी सुझाव का उल्लेख किया था। कांग्रेस का तर्क है कि पीएम मोदी ने पहले इस विचार को 'अर्बन नक्सल' विचार बताकर खारिज किया, फिर 30 अप्रैल 2025 को अचानक यू-टर्न लेकर इसे स्वीकार किया, और अब एक और यू-टर्न लेकर इसे चुपचाप दफन कर दिया है।
| समय सीमा | सरकार का रुख/कार्रवाई | कांग्रेस का आरोप |
|---|---|---|
| सितंबर 2021 | सुप्रीम कोर्ट में जाति जनगणना खारिज की | विरोधाभासी हलफनामा दाखिल किया |
| अप्रैल 2025 | जाति जनगणना की घोषणा की | चुनावी लाभ के लिए 'यू-टर्न' |
| अगस्त 2026 | 2027 जनगणना की तैयारी | जाति डेटा को बाधित करने का प्रयास |
Frequently Asked Questions
1. कांग्रेस 'ड्रॉप-डाउन मेनू' की मांग क्यों कर रही है?
ताकि जनगणना के दौरान लोग अपनी जाति का सही चयन कर सकें और डेटा में विसंगतियां न हों, जैसा कि बिहार सर्वेक्षण में देखा गया था।
2. 'यू-टर्न उस्ताद' शब्द का प्रयोग क्यों किया गया?
जयरम रमेश ने यह शब्द इसलिए इस्तेमाल किया क्योंकि उनके अनुसार पीएम मोदी ने जाति जनगणना पर अपनी राय को कई बार बदला है।