विधान परिषद में एससी/एसटी समुदायों को सहकारी क्षेत्र में उचित प्रतिनिधित्व और ऋण देने की मांग उठाई गई है। मंत्री लक्ष्मण सावादी ने नियमों के तहत कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

  • सहकारी समितियों में SC/ST समुदायों की भागीदारी जनसंख्या के अनुपात में नहीं है।
  • आरक्षण नीति के तहत ₹5,980 करोड़ के बजाय केवल ₹3,094 करोड़ ही वितरित किए गए।
  • मंत्री लक्ष्मण सावादी ने नियमों के अनुसार सदस्यता और ऋण बढ़ाने का आश्वासन दिया।
  • सूखा प्रभावित किसानों के लिए ऋण माफी की मांग भी उठाई गई।

कर्नाटक विधान परिषद में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठा, जिसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को सहकारी क्षेत्र में उचित भागीदारी सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की गई। विधान परिषद सदस्य के. शिवकुमार ने सरकार से आग्रह किया कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, जिला मध्यवर्ती सहकारी (DCC) बैंकों और अन्य सहकारी बैंकों में इन समुदायों के लिए ऋण और रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जाए।

शिवकुमार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारी क्षेत्र में आरक्षण लागू होने के बावजूद, इन समुदायों के लोगों को सदस्यता देने से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान सदस्यता इन समुदायों की जनसंख्या या उनके पास मौजूद भूमि के अनुपात में नहीं है। उन्होंने मांग की कि अनुसूचित जाति उप योजना (SCSP) और जनजातीय उप योजना (TSP) अनुदानों का उपयोग करके भूमि धारक किसानों की सदस्यता बढ़ाई जानी चाहिए।

वित्तीय विसंगतियों का खुलासा

विधान परिषद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य की 11,357 सहकारी समितियों में आरक्षण नीति के तहत SC और ST किसानों को ₹5,980 करोड़ वितरित किए जाने थे, लेकिन वास्तविकता में केवल ₹3,094 करोड़ ही दिए गए। यह भारी अंतर सरकारी नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है, जिसके लिए शिवकुमार ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सहकारी संस्थाओं में समावेशिता की कमी न केवल सामाजिक अन्याय है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के वास्तविक विकास में भी बाधा डालती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सहकारी क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों का असमान वितरण ग्रामीण भारत में आर्थिक असमानता को गहरा कर सकता है। यदि लक्षित समुदायों तक ऋण नहीं पहुँचता है, तो सरकारी कल्याणकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं।

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए, सहयोग मंत्री लक्ष्मण सावादी ने सदन को आश्वस्त किया कि नियमों के अनुसार सहकारी क्षेत्र में SC/ST समुदायों की सदस्यता और ऋण वितरण बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

Did You Know?: भारत में सहकारी समितियां ग्रामीण विकास और कृषि ऋण वितरण का एक प्रमुख स्तंभ हैं, जो लाखों किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं।

Frequently Asked Questions

1. सहकारी क्षेत्र में मुख्य समस्या क्या है?
मुख्य समस्या SC/ST समुदायों की कम भागीदारी और उनके लिए निर्धारित ऋण राशि का पूर्ण रूप से वितरित न होना है।

2. सरकार ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
सहयोग मंत्री ने आश्वासन दिया है कि नियमों के तहत सदस्यता और ऋण वितरण में सुधार किया जाएगा।