प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोझिकोड में 8 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा की कंपनी और सीएमआरएल के बीच हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़ी है।
- कोझिकोड में 8 स्थानों पर ईडी की सघन छापेमारी।
- टी. वीणा की कंपनी 'Exalogic Solutions' को सीएमआरएल से ₹2.78 करोड़ का संदिग्ध भुगतान।
- SFIO ने सीएमआरएल के चेयरमैन और 12 अन्य के खिलाफ कॉर्पोरेट धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
- पूर्व में 242 बैंक खातों में ₹18.36 करोड़ फ्रीज किए गए।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केरल के कोझिकोड में आठ अलग-अलग स्थानों पर व्यापक छापेमारी शुरू की है। यह कार्रवाई कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा की अब निष्क्रिय हो चुकी कंपनी, 'Exalogic Solutions' के बीच हुए कथित वित्तीय लेन-देन की जांच का हिस्सा है। यह मामला गंभीर कॉर्पोरेट धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करता है।
यह ताजा छापेमारी 27 मई, 2026 को की गई पिछली कार्रवाइयों का विस्तार है। उस समय ईडी ने तिरुवनंतपुरम में मुख्यमंत्री के किराए के घर, कन्नूर में उनके पैतृक आवास और पूर्व लोक निर्माण मंत्री एवं टी. वीणा के पति पी.ए. मोहम्मद रियास के निवास की तलाशी ली थी। उन ऑपरेशनों के दौरान ईडी ने 242 बैंक खातों की पहचान की थी, जिनमें कुल ₹18.36 करोड़ की राशि फ्रीज कर दी गई थी।
मामले की कानूनी पृष्ठभूमि
केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में सीएमआरएल द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत शुरू की गई जांच वैध है, क्योंकि इसके लिए किसी प्राथमिक अपराध (predicate offence) का होना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा दायर शिकायत के कारण अब एक प्राथमिक अपराध मौजूद है।
फर्जी खर्चों का खेल
जांच में यह बात सामने आई है कि सीएमआरएल ने आयकर निपटान आयोग के समक्ष अपने फर्जी खर्चों को स्वीकार किया था। इसके बाद, केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत SFIO ने जांच शुरू की। SFIO के अनुसार, सीएमआरएल के सीएमडी सशिधरन कर्ता और उनके बेटे ने 2015-16 से 2022-23 के बीच ₹30.63 करोड़ का पारिश्रमिक प्राप्त किया, जबकि कंपनी ने कोई लाभांश (dividend) नहीं दिया।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं है, बल्कि सत्ता के गलियारों में प्रभाव के उपयोग का एक गंभीर उदाहरण हो सकता है। जब एक 'वन-पर्सन कंपनी' को आईटी कंसल्टेंसी के नाम पर करोड़ों रुपये दिए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह को जन्म देता है। यह मामला केरल की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला सकता है।
कॉर्पोरेट शेल कंपनियों का उपयोग अक्सर राजनीतिक प्रभाव के माध्यम से फंड ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए घातक है।
आरोप है कि सीएमआरएल ने पिछले 15 वर्षों में ₹182 करोड़ के फर्जी नकद खर्च दिखाए। इसके अलावा, कर्ता परिवार की कंपनियों को परिवहन सेवाओं के नाम पर ₹91 करोड़ का भुगतान किया गया। इसी कड़ी में टी. वीणा की कंपनी को आईटी सेवाओं के नाम पर ₹2.78 करोड़ का भुगतान किया गया, जिसे जांच एजेंसियां 'पे-ऑफ' मान रही हैं।
| विवरण | राशि/विवरण |
|---|---|
| टी. वीणा की कंपनी को भुगतान | ₹2.78 करोड़ |
| कुल फर्जी नकद खर्च (15 वर्ष) | ₹182 करोड़ |
| फ्रीज किए गए बैंक खाते | ₹18.36 करोड़ (242 खाते) |
| कर्ता परिवार को परिवहन भुगतान | ₹91 करोड़ |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. टी. वीणा पर क्या आरोप हैं?
उन पर आरोप है कि उनकी कंपनी 'Exalogic Solutions' ने सीएमआरएल से आईटी कंसल्टेंसी के नाम पर ₹2.78 करोड़ का फर्जी भुगतान प्राप्त किया।
2. SFIO और ED की भूमिका क्या है?
SFIO ने कॉर्पोरेट धोखाधड़ी की जांच की और शिकायत दर्ज की, जबकि ED उस पैसे की लॉन्ड्रिंग (PMLA) की जांच कर रही है।