बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दशरथ मांझी की 19वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में एक बड़ी गलती कर बैठे। संबोधन के दौरान उन्होंने दो बार दशरथ मांझी की जगह जीतनराम मांझी का नाम लिया, जिससे माहौल असहज हो गया।
- तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर गलती से जीतनराम मांझी का नाम लिया।
- आरजेडी नेता ने दशरथ मांझी के लिए मरणोपरांत 'भारत रत्न' की मांग की।
- पटना में प्रतिमा स्थापना और आश्रम बनाने की अपील की।
- तेजस्वी ने एनडीए सरकार पर दलितों और गरीबों की अनदेखी का आरोप लगाया।
बिहार की राजनीति में सोमवार को एक दिलचस्प लेकिन असहज स्थिति तब पैदा हो गई जब आरजेडी (RJD) कार्यालय में 'पर्वत पुरुष' दशरथ मांझी की 19वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की जुबान फिसल गई और उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में ही दो बार दशरथ मांझी की जगह जीतनराम मांझी का नाम ले लिया।
जैसे ही तेजस्वी के मुंह से जीतनराम मांझी का नाम निकला, मंच पर मौजूद अन्य नेताओं और समर्थकों ने उन्हें तुरंत टोका। इस टोकने के बाद तेजस्वी ने खुद को संभाला और अपनी गलती सुधारते हुए दशरथ मांझी का नाम लिया। यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि जीतनराम मांझी और आरजेडी के बीच राजनीतिक रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक 'स्लिप ऑफ टंग' नहीं है, बल्कि यह बिहार की जटिल जातिगत और राजनीतिक समीकरणों को दर्शाता है। जीतनराम मांझी और दशरथ मांझी, दोनों ही समाज के वंचित वर्गों के प्रतीक हैं, लेकिन एक सक्रिय राजनीति में है और दूसरा एक वैश्विक प्रेरणा। तेजस्वी का इस तरह भ्रमित होना उनके राजनीतिक विमर्श की तात्कालिकता पर सवाल उठाता है।
"राजनीतिक मंचों पर शब्दों का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है; ऐसी गलतियाँ विपक्षी दलों को व्यंग्य करने का मौका देती हैं।"
अपनी गलती सुधारने के बाद, तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी के अदम्य साहस और संकल्प की सराहना की। उन्होंने मांझी के प्रसिद्ध मंत्र 'जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं' का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वह असंभव कार्य कर दिखाया जो दुनिया के लिए एक मिसाल है। इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि दशरथ मांझी को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।
तेजस्वी ने केवल सम्मान की बात नहीं की, बल्कि ठोस मांगों को भी सामने रखा। उन्होंने मांग की कि पटना के किसी प्रमुख चौराहे पर दशरथ मांझी की एक आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाए और उनके नाम पर एक आश्रम बनाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष से सीख सकें।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में तेजस्वी ने एनडीए (NDA) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और जदयू केवल प्रतीकों की राजनीति करते हैं, जबकि वास्तविकता में वे गरीबों और दलितों का उत्थान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आरजेडी के शासनकाल में वंचितों को जमीन और सम्मान मिला, जबकि वर्तमान सरकार उन्हें उजाड़ने का काम कर रही है।
Frequently Asked Questions
1. तेजस्वी यादव ने श्रद्धांजलि सभा में क्या गलती की?
तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर भाषण देते समय गलती से दो बार जीतनराम मांझी का नाम ले लिया।
2. तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी के लिए क्या मांगें रखीं?
उन्होंने मरणोपरांत भारत रत्न, पटना में प्रतिमा की स्थापना और एक आश्रम बनाने की मांग की।