तेलंगाना में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से 73 लाख नाम हटाए गए हैं, जबकि 92 लाख अन्य मतदाताओं को विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं।
- 73 लाख मतदाताओं को ASDD (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट) श्रेणी में डाला गया है।
- 92 लाख मतदाताओं को विसंगतियों या 2002 के रिकॉर्ड से लिंक न होने के कारण नोटिस जारी किए जाएंगे।
- दावा और आपत्ति की अवधि 17 अगस्त से 16 सितंबर तक है।
- अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर को प्रकाशित होगी।
तेलंगाना में चुनावी प्रक्रिया के तहत एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा जारी ड्राफ्ट रोल के अनुसार, मतदाता सूची से लगभग 73 लाख नामों को हटा दिया गया है। यह कदम 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision) अभियान के हिस्से के रूप में उठाया गया है, जो 25 जून से 10 अगस्त के बीच चलाया गया था।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी सुधादर्शन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि 10 अगस्त तक तेलंगाना में कुल 3,38,26,448 पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 2,64,87,213 मतदाताओं ने अपने गणना फॉर्म (Enumeration Forms) जमा किए थे। जांच के दौरान, लगभग 73 लाख नामों को ASDD (Absent, Shifted, Dead or Duplicate) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, जिसका अर्थ है कि ये मतदाता या तो अनुपस्थित हैं, स्थान बदल चुके हैं, मृत हैं या उनके नाम दोहराए गए हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम सूची से बाहर होना चुनावी पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह पात्र मतदाताओं के अधिकारों के लिए एक चुनौती भी बन सकता है। यदि प्रक्रिया में त्रुटि होती है, तो यह लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रभावित कर सकता है।
मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र की नींव है, लेकिन यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि कोई भी पात्र नागरिक प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण मताधिकार से वंचित न रहे।
इसके अलावा, 92 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने की तैयारी है। इसमें 60 लाख मतदाता 'विसंगति' (anomalies) श्रेणी में हैं और 32 लाख मतदाता 'अनमैप्ड' (unmapped) श्रेणी में हैं, जिनका विवरण 2002 की मतदाता सूची से नहीं जोड़ा जा सका है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। निर्वाचन आयोग समय-समय पर 'विशेष गहन पुनरीक्षण' चलाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सूची में केवल जीवित, स्थानीय और अद्वितीय मतदाता ही शामिल हों। यह प्रक्रिया फर्जी मतदान और डुप्लिकेट प्रविष्टियों को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
जिन मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं, वे 17 अगस्त से 16 सितंबर के बीच फॉर्म 6 भरकर अपना नाम फिर से जुड़वा सकते हैं। यदि कोई मतदाता निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट है, तो वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 24(a) के तहत 15 दिनों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के पास अपील कर सकता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यदि मेरा नाम सूची से हट गया है, तो मैं क्या करूँ?
उत्तर: आप 16 सितंबर तक फॉर्म 6 जमा करके अपना नाम वापस जुड़वा सकते हैं।
प्रश्न 2: नोटिस मिलने पर मुझे क्या करना होगा?
उत्तर: आपको सुनवाई के दौरान अपने एन्युमरेशन फॉर्म के पीछे दिए गए निर्देशों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।