विशाखापट्टनम में CITU और AITUC के बैनर तले दो अलग-अलग रैलियां निकाली गईं, जिसमें ऑटो ड्राइवरों के कल्याण और न्यूनतम मजदूरी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को घेरा गया।

  • CITU ने ऑटो ड्राइवरों के लिए कल्याण बोर्ड और ईंधन सब्सिडी की मांग की।
  • AITUC ने चार श्रम कोडों को वापस लेने और ₹26,000 न्यूनतम वेतन की मांग की।
  • श्रमिकों ने चुनाव से पहले वादे पूरे न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

विशाखापट्टनम: आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में मंगलवार को श्रमिक संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकारों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। CITU (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) और AITUC (ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस) द्वारा आयोजित ये दो अलग-अलग रैलियां शहर के प्रमुख हिस्सों से होकर गुजरीं, जिसमें श्रमिकों की लंबित मांगों को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला।

CITU: ऑटो चालकों के अधिकारों की लड़ाई

CITU से संबद्ध विशाखा ऑटो रिक्शा वर्कर्स यूनियन ने रेलवे स्टेशन से लेकर गांधी पार्क तक एक विशाल रैली निकाली। यूनियन के जिला महासचिव के. सत्यनारायण ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय ऑटो ड्राइवरों को कई महत्वपूर्ण वादे किए गए थे, जो दो साल बीत जाने के बाद भी अधूरे हैं।

श्रमिकों की प्रमुख मांगों में ऑटो ड्राइवरों के लिए एक समर्पित कल्याण बोर्ड का गठन, पेट्रोल और डीजल पर सब्सिडी, और 'वाहन मित्र योजना' का प्रभावी कार्यान्वयन शामिल है। इसके अतिरिक्त, यूनियन ने पुलिस द्वारा ऑटो रिक्शा की फोटोग्राफी करने और RTO कार्यों के निजीकरण के खिलाफ भी आवाज उठाई।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विशाखापट्टनम में बढ़ता श्रमिक असंतोष आगामी स्थानीय चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। ऑटो चालक और दिहाड़ी मजदूर शहरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और उनकी उपेक्षा सामाजिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

श्रमिकों की यह मांगें केवल आर्थिक नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं।

AITUC: श्रम सुधारों के खिलाफ मोर्चा

दूसरी ओर, विशाखा जिला परिषद (AITUC) ने जगदंबा जंक्शन से गांधी प्रतिमा तक रैली निकाली। AITUC ने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों को "श्रमिकों और किसानों विरोधी" करार दिया।

AITUC के पदाधिकारियों ने चार नए श्रम कोडों को वापस लेने, 8 घंटे का कार्य दिवस सुनिश्चित करने और ₹26,000 का न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की मांग की। उन्होंने आंगनवाड़ी, आशा (ASHA) और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं सहित सभी संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण पर भी जोर दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में ट्रेड यूनियन आंदोलन का लंबा इतिहास रहा है। CITU और AITUC जैसे संगठन दशकों से श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ते रहे हैं, विशेष रूप से जब श्रम कानूनों में बड़े बदलाव (जैसे चार श्रम कोड) प्रस्तावित किए जाते हैं, तो देशभर में ऐसे विरोध प्रदर्शन देखने को मिलते हैं।

Did You Know?: भारत में ट्रेड यूनियन आंदोलन का इतिहास 19वीं सदी के अंत से शुरू होता है, जो औद्योगिक क्रांति के दौरान श्रमिकों के शोषण के खिलाफ शुरू हुआ था।

Frequently Asked Questions

1. CITU की मुख्य मांगें क्या हैं?
CITU मुख्य रूप से ऑटो ड्राइवरों के लिए कल्याण बोर्ड, ईंधन सब्सिडी और 'वाहन मित्र योजना' लागू करने की मांग कर रहा है।

2. AITUC किस न्यूनतम वेतन की मांग कर रहा है?
AITUC ने श्रमिकों के लिए ₹26,000 प्रति माह के न्यूनतम वेतन की मांग की है।