NEET विरोध प्रदर्शनों के बाद बिहार पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई जिला एंटी-रियट फोर्स (DARF) बनाने का निर्णय लिया है, जो वीडियो और मेडिकल सपोर्ट से लैस होगी।

  • बिहार पुलिस जिला स्तर पर नई 'जिला एंटी-रियट फोर्स' (DARF) का गठन कर रही है।
  • प्रत्येक इकाई में वीडियो ग्राफी, मेडिकल सहायता और लट्ठाई दस्ते शामिल होंगे।
  • दंगों की सूचना मिलने के 20 मिनट के भीतर रिस्पॉन्स देने का लक्ष्य रखा गया है।
  • पटना, गया और मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख जिलों को प्राथमिकता के आधार पर अधिक संसाधन मिलेंगे।

बिहार में हाल ही में हुए NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों और बढ़ती कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए, बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार अब जिला और उप-मंडल स्तरों पर जिला एंटी-रियट फोर्स (DARF) के गठन की योजना बना रही है। यह नई इकाई विशेष रूप से सांप्रदायिक तनाव, हिंसक विरोध प्रदर्शनों, सड़क जाम और सरकारी संपत्ति पर हमलों से निपटने के लिए तैयार की जाएगी।

इस नई फोर्स की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आधुनिक तकनीक और बहुआयामी संरचना है। प्रत्येक इकाई में न केवल प्रशिक्षित पुलिसकर्मी और महिला पुलिसकर्मी होंगे, बल्कि वीडियो ग्राफी और दस्तावेजीकरण के लिए विशेष कर्मी भी तैनात किए जाएंगे। इसका उद्देश्य विरोध प्रदर्शनों के दौरान होने वाली हर गतिविधि का साक्ष्य रखना है, ताकि भविष्य में कानूनी कार्रवाई और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, प्रत्येक यूनिट में मेडिकल या एम्बुलेंस सहायता और संचार उपकरण भी शामिल होंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बिहार में पिछले साल हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें पुलिसकर्मियों और नागरिकों दोनों को चोटें आईं। 2025 में बिहार में 2,500 से अधिक दंगे दर्ज किए गए थे। DARF का गठन पुलिस की प्रतिक्रिया क्षमता को तेज करने और भीड़ नियंत्रण के दौरान होने वाली अराजकता को कम करने के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है।

दंगों के दौरान वीडियो दस्तावेजीकरण और त्वरित चिकित्सा सहायता का एकीकरण पुलिस की कार्यप्रणाली में जवाबदेही और सुरक्षा दोनों को बढ़ाएगा।

रणनीतिक रूप से, बिहार को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पटना को सबसे अधिक महत्व देते हुए तीन कंपनियां और 18 वाहन आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों को दो-दो कंपनियां मिलेंगी। श्रेणी 'बी' के तहत 22 जिलों को एक कंपनी और श्रेणी 'सी' के तहत कुछ जिलों को एक प्लाटून तैनात की जाएगी।

प्रशिक्षण की बात करें तो, DARF के जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षकों को पहले मेरठ स्थित रैपिड एक्शन फोर्स एकेडमी में भेजा जाएगा, ताकि वे जिला स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण प्रदान कर सकें। प्रत्येक प्लाटून को हर तीन महीने में एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स करना अनिवार्य होगा।

Did You Know?: बिहार पुलिस ने यह निर्णय तब लिया जब हालिया विरोध प्रदर्शनों में 91 पुलिसकर्मी घायल हुए थे और कई सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए थे।

Frequently Asked Questions

1. DARF फोर्स का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य दंगों, हिंसक प्रदर्शनों और सरकारी संपत्ति पर हमलों के दौरान त्वरित और व्यवस्थित तरीके से स्थिति को नियंत्रित करना है।

2. क्या इस फोर्स के पास आधुनिक तकनीक होगी?
हाँ, प्रत्येक इकाई में वीडियो ग्राफी के लिए कर्मी और संचार के लिए वायरलेस ऑपरेटर तैनात होंगे।