पुणे नगर निगम (PMC) में भाजपा और एनसीपी के बीच खींचतान तेज हो गई है। भाजपा ने बानेर क्षेत्र के विकास के लिए आवंटित 5 करोड़ रुपये के फंड को डायवर्ट करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है।
- भाजपा ने बानेर वार्ड के स्थानीय विकास कोष से 5 करोड़ रुपये हटाने का प्रस्ताव पास किया।
- यह कदम एनसीपी पार्षद अमोल बालवदकर और भाजपा के बीच बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है।
- भाजपा ने स्पष्ट किया कि एनसीपी के साथ उनका गठबंधन केवल राज्य स्तर तक सीमित है।
पुणे नगर निगम (PMC) की सामान्य निकाय बैठक में मंगलवार को एक बड़ा राजनीतिक मोड़ देखने को मिला। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बानेर क्षेत्र के लिए आवंटित 5 करोड़ रुपये के स्थानीय क्षेत्र विकास कोष को डायवर्ट करने का प्रस्ताव पेश किया। यह क्षेत्र वर्तमान में एनसीपी (NCP) के पार्षद अमोल बालवदकर के अधिकार क्षेत्र में आता है।
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब बालवदकर ने कोथरुड विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि के कथित अनियमित खर्चों की जांच की मांग की थी। उल्लेखनीय है कि कोथरुड भाजपा मंत्री चंद्रकांत पाटिल का निर्वाचन क्षेत्र है और बानेर इसी के अंतर्गत आता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भाजपा द्वारा अपने गठबंधन सहयोगी एनसीपी को कड़ा संदेश देने के लिए उठाया गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल धन का हस्तांतरण नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन की अस्थिरता का एक स्पष्ट संकेत है। जब सहयोगी दल एक-दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप करने लगते हैं, तो स्थानीय विकास परियोजनाओं की गति और सार्वजनिक विश्वास दोनों प्रभावित होते हैं।
"भाजपा का यह कदम दर्शाता है कि गठबंधन चाहे कितना भी मजबूत क्यों न दिखे, स्थानीय स्तर पर प्रतिद्वंद्विता और व्यक्तिगत राजनीतिक हितों का टकराव विकास कार्यों को बाधित कर सकता है।"
बैठक के दौरान, भाजपा के सदन नेता गणेश बिडकर ने कहा कि एनसीपी के साथ उनका गठबंधन केवल राज्य स्तर पर है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर वे सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस प्रस्ताव को 73 वोटों के बहुमत से पारित किया गया, जबकि केवल 11 सदस्यों ने इसका विरोध किया। विरोध स्वरूप अमोल बालवदकर ने सदन से वॉकआउट किया।
अमोल बालवदकर, जो पहले भाजपा के पार्षद थे, बाद में अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में शामिल हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले बानेर के लिए कोई बजट नहीं रखा था, और जब एनसीपी ने दबाव बनाया तो 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, जिसे अब वापस लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे बानेर के नागरिकों के साथ अन्याय हो रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अमोल बालवदकर का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2017 से 2022 तक वे भाजपा के पार्षद रहे। 2024 के चुनावों में कोथरुड सीट के लिए उनकी दावेदारी को देवेंद्र फडणवीस के आश्वासन के बाद वापस लेना पड़ा था, लेकिन बाद में उन्होंने एनसीपी का दामन थाम लिया।
Frequently Asked Questions
1. भाजपा ने फंड क्यों डायवर्ट किया?
भाजपा का कहना है कि एनसीपी के साथ सहयोग की कमी के कारण यह निर्णय लिया गया, जबकि एनसीपी इसे राजनीतिक प्रतिशोध मान रही है।
2. अमोल बालवदकर कौन हैं?
अमोल बालवदकर बानेर क्षेत्र से एनसीपी के पार्षद हैं और पूर्व में भाजपा से जुड़े रहे हैं।