ईरान की कट्टरपंथी संसद ने एक व्यापक योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक, मीडिया और सांस्कृतिक क्षेत्रों में 'विदेशी घुसपैठ' को रोकना है। इसके तहत नागरिकों को विदेशी संस्थाओं से संपर्क करने के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी।

  • संसद ने शैक्षणिक और मीडिया क्षेत्रों में विदेशी प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए नए प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
  • विदेशी मीडिया से बात करने या शोध के लिए संपर्क करने हेतु अब सरकारी अनुमति अनिवार्य होगी।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर 30 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
  • सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इस कानून का विरोध किया है, इसे 'ब्रेन ड्रेन' बढ़ाने वाला बताया है।

ईरान की कट्टरपंथी-प्रधान संसद ने एक अत्यंत विवादास्पद योजना के व्यापक ढांचे को मंजूरी दे दी है, जिसे देश में 'विदेशी घुसपैठ' (Foreign Infiltration) को रोकने के उपाय के रूप में पेश किया गया है। इस योजना का मुख्य ध्यान अकादमिक जगत, मीडिया और सांस्कृतिक क्षेत्र पर है। यह कदम उस सख्त कानून के पूरक के रूप में देखा जा रहा है जो पिछले साल इजरायल और अमेरिका के साथ हुए युद्ध के बाद जासूसी के खिलाफ पारित किया गया था।

इस प्रस्तावित कानून के तहत, नागरिकों और संस्थाओं को विदेशी विश्वविद्यालयों से संपर्क करने, डेटा साझा करने या विदेशी मीडिया के साथ बातचीत करने के लिए आधिकारिक प्राधिकरण प्राप्त करना होगा। मसौदे के अनुसार, देशों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा, जिसमें अमेरिका और इजरायल को उच्चतम स्तर की निगरानी वाली श्रेणी में रखा जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानून ईरान के अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैज्ञानिक प्रगति के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। यह न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करता है, बल्कि ईरान के बुद्धिजीवियों को वैश्विक समुदाय से अलग-थलग कर सकता है, जिससे देश की वैज्ञानिक क्षमता को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

यह कानून सूचना के प्रवाह पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने का एक प्रयास है, जो ईरान के लोकतांत्रिक और शैक्षणिक भविष्य को खतरे में डाल सकता है।

कानून के सख्त प्रावधानों के तहत, यदि कोई व्यक्ति विदेशी दिशा-निर्देशों के तहत ऐसी जानकारी या विश्लेषण साझा करता है जो ईरान की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे 30 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी कड़े नियम लागू होंगे; ऐसी फिल्में या संगीत जो 'इस्लामी संस्कृति' के विरुद्ध माने जाएंगे, उन पर प्रतिबंध और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

हैरानी की बात यह है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के कानूनी मामलों के उप प्रमुख, मजीद अंसारी ने इस कानून का स्पष्ट रूप से विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह कानून वैज्ञानिक कार्यों में बाधा डालेगा और ईरान में 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) की समस्या को और तेज कर देगा।

Did You Know?: ईरान में 'ब्रेन ड्रेन' एक पुरानी समस्या है, जहाँ देश के लाखों कुशल पेशेवर बेहतर जीवन की तलाश में विदेश चले जाते हैं।

Frequently Asked Questions

1. क्या इस कानून से विदेशी मीडिया से बात करना प्रतिबंधित है?
हाँ, प्रस्तावित कानून के तहत विदेशी मीडिया के साथ किसी भी तरह के अनधिकृत साक्षात्कार या बातचीत पर प्रतिबंध है और इसके लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है।

2. किन देशों पर सबसे कड़ी नजर रखी जाएगी?
अमेरिका और इजरायल को सबसे उच्च स्तर की निगरानी वाली श्रेणी में रखा गया है।