कांग्रेस विधायक इवान डिसूजा ने विधान परिषद में येतिनहोल पेयजल परियोजना में हो रही भारी देरी और बढ़ती लागत पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने परियोजना की लागत ₹8,000 करोड़ से बढ़कर ₹30,000 करोड़ होने पर चिंता जताई है।

  • येतिनहोल परियोजना 12 वर्षों से अधूरी है।
  • परियोजना की अनुमानित लागत ₹8,323 करोड़ से बढ़कर अब ₹30,000 करोड़ होने की आशंका है।
  • सरकार ने 2027 के अंत तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य रखा है।

कर्नाटक विधान परिषद में एक तीखी बहस के दौरान, कांग्रेस सदस्य इवान डिसूजा ने येतिनहोल एकीकृत पेयजल आपूर्ति परियोजना में हो रही अत्यधिक देरी पर सरकार को आड़े हाथों लिया। डिसूजा ने सरकार और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 12 साल बीत जाने के बाद भी परियोजना का पूरा न होना प्रशासन की गैर-जिम्मेदारी को दर्शाता है।

यह परियोजना सकलेशिपुर क्षेत्र के पश्चिम में बहने वाली धाराओं से 24.01 TMCF पानी को मोड़कर कोलर, चिक्काबल्लापुर और अन्य सूखा प्रभावित जिलों तक पहुँचाने के उद्देश्य से जुलाई 2012 में अनुमोदित की गई थी। डिसूजा ने बताया कि परियोजना की लागत में घातीय वृद्धि हुई है, जो जनता के करों पर भारी बोझ डाल रही है।

लागत में भारी उछाल: एक तुलनात्मक विश्लेषण

वर्षअनुमानित लागत (₹ करोड़ में)
2012 (प्रारंभिक)₹8,323.50
2014₹12,912.36
2023₹23,251.66
वर्तमान अनुमान~₹30,000

डिसूजा ने जोर देकर कहा कि योजना, भूमि अधिग्रहण, वित्तपोषण और नहर नेटवर्क के कार्यान्वयन के बीच समन्वय की कमी के कारण भारी खर्च के बावजूद अब तक एक बूंद पानी भी गंतव्य तक नहीं पहुँचा है। उन्होंने सरकार द्वारा नवंबर 2026 तक तुमकुरु में पानी छोड़ने के वादे पर संदेह व्यक्त किया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी न केवल आर्थिक संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि यह उन लाखों लोगों के जीवन को भी प्रभावित करती है जो सूखे की मार झेल रहे हैं। समन्वय की कमी और नौकरशाही की बाधाएं विकास की गति को बाधित कर रही हैं।

परियोजना की लागत में तीन गुना वृद्धि और कार्यान्वयन में देरी प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट संकेत है।

जवाब में, सदन के नेता यथिंद्र सिद्दरामाiah ने कहा कि परियोजना को चरणों में लागू किया जा रहा है और 54 पैकेजों में से 20 का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने देरी के लिए वन मंजूरी, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों, राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे विभाग से अनुमति प्राप्त करने जैसी बाधाओं को जिम्मेदार ठहराया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

येतिनहोल परियोजना कर्नाटक की सबसे महत्वाकांक्षी जल परियोजनाओं में से एक रही है। इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी घाट के जल संसाधनों का उपयोग करके राज्य के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों को जीवनदायिनी जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है। हालांकि, पिछले एक दशक में कानूनी विवादों और भूमि अधिग्रहण की समस्याओं ने इसे एक राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

Did You Know?: येतिनहोल परियोजना का लक्ष्य सात प्रमुख जिलों को सूखे से राहत दिलाना है।

Frequently Asked Questions

1. येतिनहोल परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य सकलेशिपुर के पश्चिम की नदियों से पानी मोड़कर कोलर और चिक्काबल्लापुर जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों को पेयजल उपलब्ध कराना है।

2. परियोजना में देरी का मुख्य कारण क्या बताया गया है?
सरकार ने वन विभाग, NGT और भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाओं में देरी को मुख्य कारण बताया है।