मुंबई नगर निगम (BMC) ने मेयर ऋतु तावड़े के सोशल मीडिया प्रचार के लिए ₹25 लाख खर्च करने के दावों को खारिज कर दिया है। विपक्ष ने इस खर्च पर सवाल उठाए हैं, जबकि मेयर ने किसी भी तरह के हस्तक्षेप से इनकार किया है।

  • BMC ने मेयर के कार्यालय के लिए किसी नई एजेंसी या विज्ञापन अभियान की नियुक्ति से इनकार किया है।
  • विपक्ष ने ₹25.12 लाख के सोशल मीडिया प्रबंधन प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं।
  • मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि अनुबंध तय करने में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने बुधवार को स्पष्ट किया कि मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े के कार्यालय के लिए कोई अलग संस्था नियुक्त नहीं की गई है और न ही किसी अतिरिक्त प्रचार अभियान को मंजूरी दी गई है। यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मेयर की सोशल मीडिया उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए लगभग ₹25 लाख खर्च किए जाने वाले हैं।

यह विवाद एक प्रस्ताव के इर्द-गिर्द घूम रहा है जिसमें मेयर की सोशल मीडिया उपस्थिति के प्रबंधन के लिए एक वर्ष की अवधि के लिए ₹25,12,786 के खर्च का प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रस्ताव को बीएमसी स्थायी समिति के समक्ष रखा जाना था, जिससे नागरिक खजाने से अतिरिक्त खर्च की आवश्यकता पर विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल धन के खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन के उपयोग और राजनीतिक जवाबदेही के बीच के संघर्ष को भी दर्शाता है। मुंबई जैसे महानगर में, जहाँ बुनियादी ढांचे और नागरिक सेवाओं पर भारी निवेश की आवश्यकता है, वहां जनप्रतिनिधियों के प्रचार पर खर्च को लेकर जनता और विपक्ष की नजरें टिकी रहती हैं।

सार्वजनिक धन का उपयोग सीधे तौर पर पारदर्शिता और जवाबदेही के मानकों पर आधारित होना चाहिए।

बीएमसी ने स्पष्ट किया है कि M/s Runtime Solutions Private Limited को नागरिक निकाय के सोशल मीडिया हैंडल प्रबंधित करने के लिए एक वर्ष का विस्तार दिया गया है। मेयर कार्यालय का कहना है कि संबंधित कंपनी पिछले दो वर्षों से यह कार्य संभाल रही है।

मेयर ऋतु तावड़े ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अनुबंध तय करने में कोई भूमिका नहीं निभाई है और निविदा प्रक्रिया में किसी भी हस्तक्षेप से इनकार किया है। उन्होंने कहा, "मैंने केवल एक पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि मेरा काम मीडिया तक पहुँचे। अनुबंध किसे मिलता है, इसमें मेरा कोई हाथ नहीं है। राजनीति में मेयर का नाम घसीटना बंद करें।"

विपक्ष की नेता किशोरी पेडनेकर ने इस खर्च की कड़ी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि मेयर के सोशल मीडिया प्रबंधन पर ₹25 लाख खर्च किए जा रहे हैं, जो पिछले तीन महीनों में किए गए ₹10 लाख के खर्च के अतिरिक्त है। वहीं, शिवसेना समूह के नेता अमेय घोले ने भी प्रशासन से इस खर्च की आवश्यकता का आकलन करने की मांग की है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बीएमसी, जो दुनिया के सबसे अमीर नगर निकायों में से एक है, अक्सर अपने बजट आवंटन और खर्च की प्रक्रियाओं के कारण विवादों में रहती है। मेयर का पद शहर का प्रथम नागरिक होने का प्रतीक है, लेकिन प्रशासनिक शक्तियों और राजनीतिक प्रभाव के बीच की रेखा अक्सर धुंधली हो जाती है।

क्या आप जानते हैं?: बीएमसी का वार्षिक बजट कई छोटे राज्यों के कुल बजट से भी अधिक होता है, जिससे इसके खर्चों पर होने वाली बहस अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: बीएमसी ने क्या स्पष्टीकरण दिया है?
उत्तर: बीएमसी ने कहा है कि मेयर के कार्यालय के लिए कोई नया विज्ञापन अभियान या अलग एजेंसी नियुक्त नहीं की गई है।

प्रश्न 2: विपक्ष का मुख्य आरोप क्या है?
उत्तर: विपक्ष का आरोप है कि जनता के पैसे का उपयोग मेयर के व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्रचार के लिए किया जा रहा है।