केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने KMSCL द्वारा ब्लीचिंग पाउडर की खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए विजिलेंस और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (VACB) को निर्देश दिया है। मीडिया रिपोर्टों और नए साक्ष्यों के आधार पर, ₹7.32 करोड़ के संभावित नुकसान की जांच की जाएगी।
- केरल स्वास्थ्य मंत्री ने KMSCL ब्लीचिंग पाउडर खरीद मामले में VACB जांच की मांग की है।
- आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन कर ₹7.32 करोड़ का अतिरिक्त खर्च किया गया।
- मंत्री ने पूर्व स्वास्थ्य सचिव की जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।
- दोषी पाए जाने पर सरकारी खजाने से हुई हानि की वसूली की जाएगी।
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (KMSCL) द्वारा ब्लीचिंग पाउडर की खरीद में हुई कथित अनियमितताओं की जांच अब विजिलेंस और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (VACB) द्वारा की जाएगी। मंत्री ने इस संबंध में गृह विभाग को पत्र लिखकर औपचारिक जांच की मांग की है।
यह निर्णय मीडिया रिपोर्टों में सामने आए नए साक्ष्यों और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद लिया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सचिव (स्वास्थ्य) द्वारा पहले सौंपी गई जांच रिपोर्ट अब स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि नए तथ्य और मीडिया में सामने आए विरोधाभास उस रिपोर्ट के निष्कर्षों से बिल्कुल अलग हैं।
खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी का मामला
मामला तब शुरू हुआ जब KMSCL ने फरवरी में 2026-27 के लिए एक साल के दर अनुबंध के तहत ब्लीचिंग पाउडर की खरीद के लिए एक ओपन ई-टेंडर आमंत्रित किया था। आरोप है कि इस खरीद प्रक्रिया के दौरान निर्धारित स्टोर-खरीद नियमों और निविदा (टेंडर) प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया, जिससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ा।
7 जुलाई को, मंत्री ने स्वास्थ्य सचिव को उन आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था, जिनमें दावा किया गया था कि 11 मार्च और 6 मई, 2026 के बीच की गई खरीद में लगभग ₹7.32 करोड़ का अतिरिक्त और अनावश्यक खर्च किया गया। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या सामग्री उचित मूल्य पर खरीदी गई थी और क्या सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में पारदर्शिता की कमी सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य बजट को प्रभावित करती है। जब चिकित्सा आपूर्ति जैसी आवश्यक वस्तुओं की खरीद में धांधली होती है, तो इसका असर अस्पताल के संचालन और दवाओं की उपलब्धता पर पड़ता है। यह मामला केरल में सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सरकारी धन का दुरुपयोग केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नींव पर हमला है।
गौरतलब है कि KMSCL पहले भी विवादों में रहा है। मंत्री मुरलीधरन ने पहले भी दो जांचों के आदेश दिए हैं: एक ₹50 करोड़ की दवाओं के मामले में जो गोदामों में एक्सपायर हो गईं, और दूसरा त्रिवेंद्रम टेनिस क्लब में ₹19.13 लाख की कॉर्पोरेट सदस्यता खरीदने के मामले में।
Frequently Asked Questions
1. KMSCL क्या है?
KMSCL (Kerala Medical Services Corporation Limited) केरल में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद और वितरण के लिए जिम्मेदार सरकारी संस्था है।
2. जांच का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य ब्लीचिंग पाउडर की खरीद में हुए ₹7.32 करोड़ के कथित वित्तीय नुकसान और निविदा नियमों के उल्लंघन की जांच करना है।