आंध्र प्रदेश विधानसभा ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश पंचायत राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया। इस विधेयक के माध्यम से मंडल प्रजा परिषदों (MPP) और जिला प्रजा परिषदों (ZPP) में दूसरे उपाध्यक्ष/उपाध्यक्ष के पद समाप्त कर दिए गए हैं, केवल एक-एक पद बहाल किया गया है।
- आंध्र प्रदेश विधानसभा ने पंचायत राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया।
- मंडलों में एक उपाध्यक्ष (V-P) और जिला परिषदों में एक सह-अध्यक्ष (V-C) का पद बहाल।
- 2021 के संशोधन द्वारा जोड़े गए दूसरे V-P और V-C के पद अब समाप्त।
- सरकार ने दूसरे पदों को प्रशासनिक रूप से अनावश्यक और व्यर्थ माना।
विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश विधानसभा ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश पंचायत राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। इस महत्वपूर्ण विधायी कदम के साथ, मंडल प्रजा परिषदों (MPP) और जिला प्रजा परिषदों (ZPP) में उपाध्यक्ष (V-P) और सह-अध्यक्ष (V-C) के पदों की संख्या को पूर्ववत कर दिया गया है। अब प्रत्येक MPP में केवल एक उपाध्यक्ष और प्रत्येक ZPP में केवल एक सह-अध्यक्ष होगा।
यह विधेयक 1994 के आंध्र प्रदेश पंचायत राज (APPR) अधिनियम की मूल व्यवस्था को बहाल करता है। अधिनियम की धारा 153 के तहत, प्रत्येक MPP के लिए निर्वाचित सदस्यों में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का चुनाव अनिवार्य था। इसी तरह, ZPP के लिए भी एक सह-अध्यक्ष का प्रावधान था। यह व्यवस्था वर्ष 2021 तक प्रभावी थी।
पृष्ठभूमि: 2021 का संशोधन और उसके परिणाम
वर्ष 2021 में, अधिनियम 14 (Act 14 of 2021) के माध्यम से किए गए संशोधनों ने प्रत्येक MPP के लिए एक दूसरे उपाध्यक्ष (second V-P) और प्रत्येक ZPP के लिए दो सह-अध्यक्षों (two V-Cs) के पद का प्रावधान पेश किया था। इन संशोधनों का उद्देश्य स्थानीय शासन में नेतृत्व को मजबूत करना और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना माना गया था। हालांकि, समय के साथ सरकार ने यह पाया कि इन अतिरिक्त पदों से अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुए।
सरकार का मूल्यांकन: व्यर्थ नेतृत्व संरचना
सरकारी अवलोकन के अनुसार, MPP में दूसरे उपाध्यक्ष और ZPP में दूसरे सह-अध्यक्ष के पद के लिए किया गया प्रावधान अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहा। इससे MPP और ZPP के प्रशासन में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ। सरकार ने निष्कर्ष निकाला कि इन अतिरिक्त पदों को बनाए रखने से कोई महत्वपूर्ण प्रशासनिक उद्देश्य पूरा नहीं होता है। इसने स्थानीय शासन में बहु-नेतृत्व (plural leadership) बनाने को अनावश्यक और प्रशासन को बेहतर बनाने में कोई मूल्य न जोड़ने वाला माना।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह विधायी बदलाव जमीनी स्तर पर शासन में दक्षता और स्पष्टता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनावश्यक पदों को समाप्त करने से न केवल संसाधनों की बचत होगी, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी तेजी आ सकती है। यह कदम यह भी दर्शाता है कि सरकार प्रशासनिक सुधारों के प्रति गंभीर है और व्यर्थ की संरचनाओं को खत्म करने से कतराएगी नहीं।
स्थानीय निकायों में नेतृत्व की संरचना को सुव्यवस्थित करना, दक्षता बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक आवश्यक कदम है।
क्या आप जानते हैं?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- इस विधेयक के पारित होने से MPP और ZPP के कामकाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस विधेयक के पारित होने से MPP और ZPP में नेतृत्व संरचना सरल हो जाएगी। दूसरे उपाध्यक्ष/सह-अध्यक्ष के पद समाप्त होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता आ सकती है और प्रशासनिक व्यय में कमी आ सकती है।
- यह संशोधन कब से प्रभावी होगा?
विधेयक पारित हो चुका है और अब यह कानून बन जाएगा। इसके प्रभावी होने की विशिष्ट तिथि सरकारी अधिसूचना द्वारा घोषित की जा सकती है, लेकिन आम तौर पर ऐसे संशोधन पारित होने के तुरंत बाद लागू हो जाते हैं।