मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। बैठक के दौरान न्यायिक अधिकारियों के आवास और इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई।
- मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी पर विभागों को कड़ी फटकार लगाई।
- न्यायिक अधिकारियों के लिए द्वारका में आवासीय परिसर के निर्माण में देरी पर नाराजगी जताई।
- इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई।
- तिहाड़ जेल के बोझ को कम करने के लिए नरेला में नए जेल परिसर के निर्माण पर जोर।
नई दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों को उनकी कार्यप्रणाली और महत्वपूर्ण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी के लिए कड़ी फटकार लगाई है। बैठक का मुख्य उद्देश्य वित्त विभाग की 'व्यय वित्त समिति' (EFC) द्वारा पिछले वर्ष अनुमोदित बड़े बजट वाली परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना था।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से द्वारका सेक्टर 19 में न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रस्तावित आवासीय परिसर के निर्माण में हो रही देरी पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। लगभग 171.58 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को अप्रैल 2025 में मंजूरी दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि हालांकि एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) नियुक्त किया गया है, लेकिन अभी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। मुख्यमंत्री ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले PMC के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी न केवल सरकारी धन के कुशल उपयोग को प्रभावित करती है, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं और न्यायिक प्रशासन की दक्षता को भी बाधित करती है। परियोजनाओं का समय पर पूरा न होना प्रशासनिक विफलता का संकेत है जिसे अब गंभीरता से लिया जा रहा है।
प्रशासनिक सुस्ती और टेंडर प्रक्रियाओं में देरी विकास की गति को धीमा कर देती है, जिसे अब मुख्यमंत्री के कड़े रुख से सुधारा जा सकता है।
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने द्वारका सेक्टर-22 और द्वारका सेक्टर-8 में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की भी समीक्षा की। 107.02 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के लिए भी अभी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसके अलावा, यमुना की सफाई और अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर कनेक्शन प्रदान करने के लिए 3,104 करोड़ रुपये की लागत वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट की भी समीक्षा की गई।
जेल सुधारों के क्षेत्र में, मुख्यमंत्री ने नरेला में एक उच्च सुरक्षा वाले जेल परिसर के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। तिहाड़ जेल में बढ़ती भीड़ को देखते हुए, सरकार ने नरेला में एक नया जेल परिसर बनाने का निर्णय लिया है, जिससे तिहाड़ के बोझ को चरणबद्ध तरीके से कम किया जा सके। होम डिपार्टमेंट ने इसके लिए नरेला में 27 एकड़ भूमि की पहचान कर ली है।
| परियोजना का नाम | अनुमानित लागत | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| न्यायिक अधिकारी आवास (द्वारका) | ₹171.58 करोड़ | PMC द्वारा देरी, टेंडर लंबित |
| इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर | ₹107.02 करोड़ | टेंडर प्रक्रिया जारी |
| सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट | ₹3,104 करोड़ | 11 कार्य आवंटित, अन्य प्रक्रिया में |
| नरेला हाई-सिक्योरिटी जेल | ₹148.58 करोड़ | कार्य प्रगति पर |
Frequently Asked Questions
1. मुख्यमंत्री ने किन मुख्य परियोजनाओं की समीक्षा की?
मुख्यमंत्री ने न्यायिक आवास, इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और नरेला जेल निर्माण जैसी परियोजनाओं की समीक्षा की।
2. न्यायिक अधिकारियों के आवास परियोजना में देरी का कारण क्या है?
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) द्वारा टेंडर दस्तावेज को अंतिम रूप देने में देरी मुख्य कारण है।