कर्नाटक कैबिनेट ने सूखे की मार झेल रहे जिलों में पानी की कमी दूर करने के लिए क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सिंचाई मंत्री एन. चेलुवरयस्वामी ने विधानसभा में इस महत्वपूर्ण निर्णय की पुष्टि की है।
- राज्य कैबिनेट ने सूखे प्रभावित क्षेत्रों में क्लाउड सीडिंग के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
- सिंचाई मंत्री एन. चेलुवरयस्वामी ने विधानसभा में इस निर्णय की घोषणा की।
- हावेरी जिले में पूर्व में किए गए क्लाउड सीडिंग प्रयोगों के सकारात्मक परिणाम देखे गए थे।
- विपक्ष ने सूखा राहत कोष के लिए केंद्र से मदद की मांग की है।
बेंगलुरु: कर्नाटक के सूखा प्रभावित जिलों में पीने के पानी और चारे की गंभीर किल्लत को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सिंचाई मंत्री एन. चेलुवरयस्वामी ने गुरुवार को विधान सभा में सूचित किया कि राज्य कैबिनेट ने आवश्यकता पड़ने पर सूखे प्रभावित क्षेत्रों में क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) यानी कृत्रिम वर्षा कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यह निर्णय कांग्रेस विधायक एन.एच. कोनारेड्डी द्वारा दिए गए ध्यानाकर्षण नोटिस के जवाब में आया है। कोनारेड्डी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वर्षा की कमी के कारण जिले पीने के पानी और पशुओं के चारे की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हावेरी जिले के विधायकों द्वारा किए गए क्लाउड सीडिंग के पिछले प्रयोगों के सकारात्मक परिणाम मिले थे, जिससे उस क्षेत्र में कुछ मात्रा में वर्षा दर्ज की गई थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, कर्नाटक जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए यह निर्णय जीवन रक्षक साबित हो सकता है। जब प्राकृतिक मानसून विफल हो जाता है, तो क्लाउड सीडिंग जैसी आधुनिक तकनीकें मिट्टी की नमी बनाए रखने और भूजल स्तर को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, यह तकनीक महंगी है और इसकी सफलता वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
कृत्रिम वर्षा एक वैज्ञानिक समाधान है, लेकिन इसे केवल तभी लागू किया जाना चाहिए जब बादलों में पर्याप्त नमी मौजूद हो।
विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान राजनीतिक गहमागहमी भी देखने को मिली। जहाँ सत्ता पक्ष ने सूखे से निपटने के लिए तकनीकी समाधानों पर जोर दिया, वहीं विपक्षी दलों (भाजपा और जेडीएस) ने सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष ने योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सरकार से मांग की कि वे केंद्र सरकार से सूखा राहत कोष जारी करने के लिए प्रभावी ढंग से बातचीत करें। उन्होंने विधायकों के नेतृत्व में टास्क फोर्स बनाने का सुझाव भी दिया ताकि राहत कार्यों का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में क्लाउड सीडिंग का उपयोग समय-समय पर सूखे की स्थिति से निपटने के लिए किया जाता रहा है। यह प्रक्रिया सिल्वर आयोडाइड जैसे रसायनों का उपयोग करके बादलों में नमी को वर्षा में बदलने की एक तकनीक है। कर्नाटक में, बढ़ते शहरीकरण और अनियमित मानसून के कारण जल संकट एक आवर्ती समस्या बन गई है।
Frequently Asked Questions
1. क्लाउड सीडिंग क्या है?
यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें बादलों में विशेष रसायन छिड़ककर कृत्रिम रूप से बारिश कराने का प्रयास किया जाता है।
2. कर्नाटक सरकार ने यह निर्णय क्यों लिया?
राज्य के कई जिले सूखे के कारण पीने के पानी और पशुओं के चारे की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।