लेह में नागरिक समाज समूहों ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों को अपनी गैर-परक्राम्य मांगों की सूची सौंपी है, जिसमें लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग प्रमुख है।

  • लेह अपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) ने गृह मंत्रालय को अपनी मांगें सौंपीं।
  • मुख्य मांग: लद्दाख विधानसभा, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद का गठन।
  • सितंबर को 'शहीद माह' के रूप में मनाया जाएगा।
  • प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग।

लद्दाख के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। बुधवार को लेह में आयोजित एक अनौपचारिक बैठक के दौरान, लेह अपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के प्रतिनिधियों ने गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों और लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंडरा को अपनी 'गैर-परक्राम्य' (non-negotiable) मांगों की एक विस्तृत सूची सौंपी है। यह कदम सितंबर में होने वाली संभावित औपचारिक बैठक से पहले उठाया गया है।

राज्य का दर्जा और विधायी शक्तियां

नागरिक समूहों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि लद्दाख में एक लद्दाख विधानसभा होनी चाहिए, जिसका नेतृत्व एक मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उपराज्यपाल (LG) को विधानसभा की सहायता और सलाह पर कार्य करना चाहिए, ताकि अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तरह प्रशासनिक संघर्षों से बचा जा सके। इसके अलावा, निर्वाचित विधानसभा के पास कराधान, बजट, सार्वजनिक धन और ऋण लेने जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार होने चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि लद्दाख की ये मांगें केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि अस्तित्वगत हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से स्थानीय आबादी में स्वायत्तता खोने का डर बढ़ गया है। यदि सरकार इन मांगों को लेकर लचीला रुख नहीं अपनाती है, तो क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।

लद्दाख की मांगें केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बारे में नहीं हैं, बल्कि यह अपनी सांस्कृतिक और संवैधानिक पहचान को सुरक्षित करने का एक संघर्ष है।

LAB अध्यक्ष चेरिंग दोर्जे लाकूक ने बैठक की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चिंता जताई कि एमएचए की उच्चाधिकार प्राप्त समिति में ऐसे सदस्य शामिल हैं जो पहले की सूची में नहीं थे और वे केवल सरकार का पक्ष रख रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सितंबर 2025 के विरोध प्रदर्शनों में शामिल स्थानीय लोगों पर दर्ज सभी मामले तुरंत वापस लिए जाएं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संघर्ष

लद्दाख में यह संघर्ष तब गहरा गया जब इसे जम्मू-कश्मीर से अलग कर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। स्थानीय लोग छठी अनुसूची की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी भूमि, संस्कृति और नौकरियों को संवैधानिक सुरक्षा मिल सके। पिछले साल सितंबर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान चार नागरिकों की मृत्यु हो गई थी, जिसे याद करने के लिए LAB और KDA ने सितंबर को 'शहीद माह' घोषित किया है।

Did You Know?: लद्दाख की भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक महत्व इसे भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है, यही कारण है कि यहाँ की राजनीतिक स्थिरता राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: लद्दाख के नागरिक समूह मुख्य रूप से क्या मांग रहे हैं?
उत्तर: वे पूर्ण राज्य का दर्जा, लद्दाख विधानसभा का गठन और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न 2: 'शहीद माह' का क्या महत्व है?
उत्तर: यह उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने राज्य के दर्जे और अधिकारों के लिए संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाई थी।