MMDR संशोधन बिल 2026 को लेकर ओडिशा में राजनीतिक तनाव चरम पर है। कांग्रेस ने खनिज संपन्न जिलों में आर्थिक नाकेबंदी की धमकी दी है, जबकि बीजेडी और कांग्रेस दोनों ने इस कानून का विरोध किया है।
- कांग्रेस ने MMDR संशोधन बिल 2026 के विरोध में आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी दी है।
- बीजेडी और कांग्रेस ने राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर विशेष विधानसभा सत्र की मांग की है।
- भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य का राजस्व पूरी तरह सुरक्षित है।
ओडिशा में खनिज और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (MMDR Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक संघर्ष गहरा गया है। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि केंद्र सरकार इस कानून को तुरंत वापस नहीं लेती है, तो राज्य के खनिज समृद्ध जिलों में आर्थिक नाकेबंदी लागू की जाएगी।
कांग्रेस के इस कड़े रुख का मुख्य कारण यह है कि उनका मानना है कि नया बिल ओडिशा के अपने खनिज संसाधनों पर अधिकारों को कम करता है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यह कानून 'ओडिशा विरोधी' और 'जनजातीय विरोधी' है। इस मुद्दे पर बीजेडी (BJD) और कांग्रेस ने हाथ मिला लिया है, जिससे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक मोर्चा तैयार हो गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक संप्रभुता का भी है। यदि राज्यों के पास खनन पर कर या उपकर (Cess) लगाने की शक्ति नहीं रहती है, तो उनके राजस्व मॉडल में भारी गिरावट आ सकती है।
यह बिल राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर सीधा प्रहार कर सकता है, जिससे भविष्य में विकास कार्यों के लिए धन की कमी हो सकती है।
बीजेडी की विधानसभा में मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने चेतावनी दी कि इस कानून के कारण ओडिशा अपनी कर लगाने की शक्ति खो देगा, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान होगा। दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने तर्क दिया कि मोदी सरकार के सुधारों के कारण ही ओडिशा का खनन राजस्व 5,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये हुआ है। उन्होंने दावा किया कि नीलामी प्रीमियम, रॉयल्टी और जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड का 100 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को ही मिलता रहेगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
खनन क्षेत्र में सुधारों का इतिहास पुराना है। 2015 में MMDR अधिनियम में किए गए बदलावों ने रॉयल्टी को 10% से बढ़ाकर 15% कर दिया था, जिससे राज्यों की आय में वृद्धि हुई थी। अब, 2026 का नया संशोधन उसी ढांचे को बदलने की कोशिश कर रहा है, जो विवाद की जड़ है।
| मुद्दा | विपक्ष (BJD/Congress) का तर्क | सत्ता पक्ष (BJP) का तर्क |
|---|---|---|
| राजस्व सुरक्षा | राज्य कर लगाने की शक्ति खो देगा। | राजस्व और रॉयल्टी पूरी तरह सुरक्षित है। |
| अधिकार | केंद्र राज्यों के अधिकार छीन रहा है। | यह देश की खनन सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम है। |
Frequently Asked Questions
1. कांग्रेस आर्थिक नाकेबंदी क्यों चाहती है?
कांग्रेस का कहना है कि MMDR बिल ओडिशा के खनिज अधिकारों को छीन रहा है, इसलिए वे विरोध में नाकेबंदी करेंगे।
2. भाजपा का इस पर क्या कहना है?
भाजपा का कहना है कि नया बिल राज्य के राजस्व को नुकसान नहीं पहुँचाएगा और यह आर्थिक भविष्य के लिए अच्छा है।