पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्र सरकार और तमिलनाडु से एक एकीकृत सतही जल संसाधन प्रणाली विकसित करने के लिए सहयोग की मांग की है। उन्होंने भूजल की खराब गुणवत्ता और जल संकट को दूर करने के लिए नदियों को जोड़ने का प्रस्ताव दिया है।
- पुडुचेरी में भूजल की गुणवत्ता (TDS और आयरन स्तर) चिंताजनक रूप से खराब है।
- उपराज्यपाल ने सांतर बांध से पुडुचेरी तक समर्पित पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव दिया है।
- काराकल क्षेत्र के लिए कावेरी जल भंडारण हेतु तकनीकी और वित्तीय सहायता की मांग की गई है।
- ADB और विश्व बैंक से फंड प्राप्त करने की मंजूरी का स्वागत किया गया।
तमिलनाडु के ममाल्लापुरम में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में, पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्य तमिलनाडु से एक महत्वाकांक्षी जल प्रबंधन योजना के लिए समर्थन मांगा। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी। पुडुचेरी की वर्तमान जल स्थिति को देखते हुए, उपराज्यपाल ने एक 'एकीकृत सतही जल संसाधन प्रणाली' (Integrated Surface Water Resource System) विकसित करने पर जोर दिया ताकि लोगों को साल भर पीने योग्य पानी मिल सके।
उपराज्यपाल ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पुडुचेरी के पास अपने स्वयं के सतही जल संसाधन नहीं हैं और वर्तमान में यह पूरी तरह से भूजल पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में TDS का स्तर 3,000 ppm से अधिक है, जबकि आयरन और नाइट्रेट का स्तर भी असुरक्षित रूप से उच्च है। इस संकट से निपटने के लिए, उन्होंने शंकरबारानी और दक्षिण पेन्नार नदियों को प्रस्तावित गोदावरी लिंक के साथ जोड़ने का सुझाव दिया और मांग की कि पुडुचेरी को राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA) की परियोजनाओं में शामिल किया जाए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेश के लिए जल सुरक्षा केवल एक बुनियादी आवश्यकता नहीं, बल्कि एक अस्तित्वगत मुद्दा है। भूजल का अत्यधिक दोहन और बढ़ता प्रदूषण आने वाले समय में इस क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता पैदा कर सकता है। केंद्र और पड़ोसी राज्यों के बीच समन्वय के बिना, पुडुचेरी की जल संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
पुडुचेरी की जल सुरक्षा के लिए अंतर-राज्यीय सहयोग और नदियों के लिंक प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
ऐतिहासिक संदर्भों पर चर्चा करते हुए, उपराज्यपाल ने याद दिलाया कि सांतर बांध से पुडुचेरी को पानी छोड़ने के लिए 1910 में पहला समझौता हुआ था, जिसे बाद में 1969, 1976 और 2007 में नवीनीकृत किया गया। वर्तमान में, पानी का विनियमन केवल मानसून के दो महीनों तक सीमित है। पुडुचेरी प्रशासन अब सांतर बांध से एक समर्पित पाइपलाइन बिछाने का इच्छुक है, जिसके लिए केंद्र, तमिलनाडु और पुडुचेरी के वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, काराकल क्षेत्र के लिए कावेरी जल के प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। काराकल, कावेरी बेसिन का अंतिम छोर है और इसे सालाना 7 TMC कावेरी जल प्राप्त करने का अधिकार है। पुडुचेरी सरकार एनआईटी (NIT) काराकल की सहायता से मानसून के दौरान अतिरिक्त कावेरी जल को संग्रहीत करने के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रही है।
Frequently Asked Questions
1. पुडुचेरी में जल संकट का मुख्य कारण क्या है?
पुडुचेरी में अपने स्वयं के सतही जल स्रोत नहीं हैं और वर्तमान भूजल में TDS, आयरन और नाइट्रेट का स्तर बहुत अधिक है।
2. उपराज्यपाल ने कौन सी प्रमुख नदियों को जोड़ने का प्रस्ताव दिया है?
उन्होंने शंकरबारानी और दक्षिण पेन्नार नदियों को गोदावरी लिंक के साथ जोड़ने का प्रस्ताव दिया है।