केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ देर रात हुई बैठक के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के परिसीमन मुद्दे पर रुख में नरमी आने से राज्य में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ कड़ा प्रस्ताव पारित होने के कुछ ही दिनों बाद, क्षेत्रीय परिषद की बैठक में सीएम विजय के बदले सुर ने विपक्ष को हमला करने का मौका दे दिया है।
- तमिलनाडु के सीएम विजय ने लोकसभा सीटों को 543 पर फ्रीज करने की मांग से हटकर राज्यों के प्रतिनिधित्व प्रतिशत की सुरक्षा की मांग की।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ देर रात हुई मुलाकात के तुरंत बाद यह बदलाव देखा गया, जिसे विपक्ष 'यू-टर्न' बता रहा है।
- दक्षिण के राज्यों को डर है कि आबादी नियंत्रण के सफल प्रयासों के बावजूद 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन से उनका राजनीतिक प्रभाव कम हो जाएगा।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के हालिया बयानों ने राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद (Southern Zonal Council) की बैठक में मुख्यमंत्री के बदले हुए सुरों ने सभी को चौंका दिया। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले तमिलनाडु विधानसभा ने परिसीमन के खिलाफ एक कड़ा प्रस्ताव पारित किया था। विपक्षी दलों, विशेषकर द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री विजय को घेरना शुरू कर दिया है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत बुधवार देर रात मुख्यमंत्री विजय और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच हुई एक गुप्त बैठक के बाद हुई। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद शाह के साथ विजय की यह पहली आधिकारिक मुलाकात थी। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी देखी गई, जिसे राजनीतिक विश्लेषक केंद्र और राज्य के बीच टकराव टालने की एक नई रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
विवाद का मुख्य कारण विधानसभा प्रस्ताव और क्षेत्रीय परिषद में दिए गए भाषण के बीच का अंतर है। 12 अगस्त को पारित विधानसभा प्रस्ताव में मांग की गई थी कि लोकसभा सीटों की संख्या को स्थाई रूप से 543 पर ही फ्रीज रखा जाए ताकि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिणी राज्यों को नुकसान न हो। लेकिन अमित शाह की मौजूदगी में विजय ने सीटों को फ्रीज करने की यह मांग नहीं दोहराई। इसके बजाय, उन्होंने केंद्र से "स्पष्ट विधायी आश्वासन" देने का आग्रह किया कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के कारण किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व प्रतिशत में कमी नहीं होनी चाहिए।
शब्दों का यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। सीटों की कुल संख्या को फ्रीज करने के बजाय प्रतिनिधित्व के 'प्रतिशत हिस्से' को सुरक्षित करने की मांग करने से लोकसभा सीटों के विस्तार का रास्ता खुला रहता है, बशर्ते तमिलनाडु जैसे राज्यों का राजनीतिक महत्व कम न हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय का यह व्यावहारिक रुख केंद्र सरकार के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने की कोशिश है।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि परिसीमन का मुद्दा केवल संसदीय सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के संघीय ढांचे के दीर्घकालिक संतुलन से जुड़ा है। यदि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण होता है, तो उत्तर भारत के राज्यों का राजनीतिक प्रभाव काफी बढ़ जाएगा, जिससे दक्षिण के राज्य हाशिए पर आ सकते हैं। सीएम विजय का यह गैर-टकराव वाला रुख सीधे विरोध के बजाय केंद्र से सुरक्षा उपाय हासिल करने की एक रणनीतिक चाल हो सकता है।
| विशेषता | विधानसभा प्रस्ताव का रुख | क्षेत्रीय परिषद का रुख (शाह से मुलाकात के बाद) |
|---|---|---|
| सीट सीमा | 543 सीटों पर स्थाई रोक की मांग | 543 सीटों की सीमा का कोई जिक्र नहीं किया |
| मूल रणनीति | लोकसभा सीटों के विस्तार का पूर्ण विरोध | प्रतिनिधित्व के प्रतिशत हिस्से की सुरक्षा पर ध्यान |
| केंद्र के प्रति रुख | आक्रामक और समझौता न करने वाला | सहयोगात्मक और विधायी आश्वासन की मांग |
"विधानसभा के कड़े प्रस्ताव से हटकर सुरक्षा उपायों की नरम मांग की ओर बढ़ना विजय की व्यावहारिक और गैर-टकराव वाली राजनीति को दर्शाता है, हालांकि इससे उनके सहयोगियों में नाराजगी बढ़ सकती है," राजनीतिक विश्लेषक टी.आर. जवाहर ने कहा।
परिसीमन का ऐतिहासिक संदर्भ
परिसीमन का अर्थ जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है। 1976 में 42वें संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा सीटों के आवंटन को 1971 की जनगणना के आधार पर फ्रीज कर दिया गया था, जिसे बाद में 2001 में 84वें संशोधन द्वारा 2026 तक बढ़ा दिया गया था। अब जब यह समयसीमा समाप्त होने वाली है, तो उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव को लेकर तनाव चरम पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विपक्ष सीएम विजय की आलोचना क्यों कर रहा है?
विपक्ष का आरोप है कि गृह मंत्री अमित शाह से देर रात हुई मुलाकात के बाद सीएम विजय ने परिसीमन पर अपना कड़ा रुख छोड़ दिया है और वह केंद्र के दबाव में आ गए हैं।
2. परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों की मुख्य चिंता क्या है?
दक्षिणी राज्यों को डर है कि यदि नई जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ, तो संसद में उनकी सीटें कम हो जाएंगी, जिससे देश की राजनीति और करों के बंटवारे में उनका प्रभाव घट जाएगा।