सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईटी एक्ट की धारा 66A को रद्द किए जाने के 11 साल बाद, महाराष्ट्र सरकार अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) में संशोधन कर सोशल मीडिया मानहानि को अपराध बनाने की योजना बना रही है।
- महाराष्ट्र सरकार ने सोशल मीडिया पर मानहानि से निपटने के लिए BNS में संशोधन का प्रस्ताव दिया है।
- यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 66A को असंवैधानिक घोषित किए जाने के 11 साल बाद उठाया जा रहा है।
- प्रस्ताव में दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपायों (safeguards) को शामिल करने की सिफारिश की गई है।
- इस संशोधन को लागू करने के लिए राज्य विधानसभा के साथ-साथ केंद्र और राष्ट्रपति की मंजूरी अनिवार्य होगी।
मुंबई: भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विवादित धारा 66A को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के 11 साल बाद, महाराष्ट्र सरकार डिजिटल दुनिया में मानहानि से निपटने के लिए एक नया कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। एक विशेष सरकारी समिति ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) में संशोधन करने की सिफारिश की है, ताकि सोशल मीडिया पर की जाने वाली मानहानिपूर्ण पोस्ट को विशेष रूप से आपराधिक दायरे में लाया जा सके।
समिति ने अपनी सिफारिशें राज्य के विधि और न्याय विभाग को सौंप दी हैं। समिति का मानना है कि BNS में संशोधन करना सबसे प्रभावी तरीका होगा क्योंकि यह 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) के अंतर्गत आता है। इससे कानून को अधिक मजबूती मिलेगी और अदालती चुनौतियों का सामना करने में आसानी होगी। समिति ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम या आईटी अधिनियम में बदलाव के विकल्प को खारिज कर दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की सुरक्षा के बीच एक महीन रेखा खींचने का प्रयास है। वर्तमान में, BNS मानहानि को परिभाषित तो करता है, लेकिन इसमें ऑनलाइन सामग्री या सोशल मीडिया पोस्ट का कोई विशिष्ट उल्लेख नहीं है।
सोशल मीडिया पर बिना सबूत के किसी की छवि खराब करने की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए यह कानूनी बदलाव अनिवार्य हो गया है।
गौरतलब है कि 2015 में श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66A को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। अदालत ने कहा था कि यह धारा बहुत व्यापक और अस्पष्ट थी, जो नागरिकों के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करती थी।
समिति ने इस बार विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है ताकि कानून का दुरुपयोग न हो सके। इससे पहले केरल सरकार ने भी इसी तरह का प्रयास किया था, लेकिन भारी विरोध और कानूनी चुनौतियों के कारण उसे वापस लेना पड़ा था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा था कि सोशल मीडिया का उपयोग बिना किसी प्रमाण के दूसरों को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
Frequently Asked Questions
1. क्या यह नया कानून तुरंत लागू हो जाएगा?
नहीं, राज्य विधानसभा से पारित होने के बाद इसे केंद्र सरकार द्वारा जांचा जाएगा और राष्ट्रपति की सहमति के बाद ही यह प्रभावी होगा।
2. क्या इससे सामान्य आलोचना भी अपराध बन जाएगी?
समिति ने दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपायों (safeguards) की सिफारिश की है ताकि केवल वास्तविक मानहानि को ही लक्षित किया जा सके।