NCERT के नए राजनीति विज्ञान पैनल में RSS से जुड़े सदस्यों की मौजूदगी पर देश में राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस ने इसे शिक्षा का भगवाकरण बताया है, जबकि भाजपा ने इसे यूपीए शासन के दौरान चले 'वामपंथी झुकाव' का जवाब करार दिया है।

  • NCERT ने कक्षा 11 और 12 के लिए 20 सदस्यीय राजनीति विज्ञान पैनल का गठन किया है।
  • कांग्रेस और सपा ने पैनल में RSS और ABVP से जुड़े सदस्यों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है।
  • भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए यूपीए काल के 'पक्षपाती' इतिहास को याद दिलाया।
  • नया पैनल भारतीय ज्ञान प्रणाली और सांस्कृतिक जड़ों को पाठ्यक्रम में शामिल करेगा।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा कक्षा 11 और 12 की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के लिए एक नए बीस सदस्यीय पैनल के गठन ने भारत में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विवाद तब गहरा गया जब मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि पैनल के चार सदस्यों के कथित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से संबंध हैं।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दलों ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार शिक्षा प्रणाली का 'भगवाकरण' करने और ऐतिहासिक तथ्यों को बदलने का प्रयास कर रही है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि शैक्षणिक संस्थानों और पाठ्यक्रम तैयार करने वाले पैनलों में विचारधारा को जबरन थोपा जा रहा है, जिससे शिक्षा की निष्पक्षता खतरे में पड़ सकती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत में शिक्षा का पाठ्यक्रम हमेशा से एक वैचारिक युद्धक्षेत्र रहा है। NCERT के पैनल में बदलाव केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक निहितार्थ रखते हैं, क्योंकि ये आने वाली पीढ़ी के ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को आकार देते हैं।

शिक्षा का पाठ्यक्रम केवल तथ्यों का संग्रह नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य के नागरिक निर्माण का आधार है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कांग्रेस और पूर्ववर्ती यूपीए (UPA) सरकार की नीतियों की आलोचना की। भाजपा का तर्क है कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान 'वामपंथी झुकाव' वाले विद्वानों को संरक्षण दिया जाता था ताकि एक विशिष्ट राजनीतिक विमर्श को बढ़ावा दिया जा सके।

यह नया पैनल मुख्य रूप से भारतीय शिक्षा प्रणाली में 'सांस्कृतिक जड़ों' और 'भारतीय ज्ञान प्रणालियों' (Indian Knowledge Systems) को एकीकृत करने के कार्य के लिए नियुक्त किया गया है। सरकार का उद्देश्य पाठ्यक्रम को अधिक समावेशी और भारतीय संदर्भों के प्रति संवेदनशील बनाना है, जबकि विपक्ष इसे एकतरफा विचारधारा थोपने के रूप में देख रहा है।

ऐतिहासिक रूप से, भारत में NCERT के पाठ्यक्रम में बदलाव हमेशा विवाद का विषय रहा है। चाहे वह मुगल काल का चित्रण हो या स्वतंत्रता संग्राम के नायक, हर बदलाव के साथ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वैचारिक टकराव देखने को मिलता है।

Did You Know?: NCERT भारत में स्कूली शिक्षा के लिए मानक निर्धारित करने वाली सर्वोच्च संस्था है, जिसका गठन 1961 में किया गया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विवाद का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: विवाद का मुख्य कारण NCERT के नए पैनल में RSS और ABVP से जुड़े सदस्यों की कथित उपस्थिति है, जिसे विपक्ष 'भगवाकरण' मान रहा है।

प्रश्न 2: भाजपा का इस पर क्या रुख है?
उत्तर: भाजपा का कहना है कि वे केवल शिक्षा को भारतीय जड़ों से जोड़ रहे हैं और कांग्रेस ने पहले वामपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया था।